एक युग का अंत: भारतीय सिनेमा के बेताज बादशाह और अनूठे अभिनेता नाना पाटेकर का निधन

इंद्र यादव/मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। अपनी बेबाक अदाकारी, दमदार आवाज और रोंगटे खड़े कर देने वाले अंदाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से पूरे फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और फैंस के बीच एक गहरा खालीपन आ गया है।
नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह एक संस्था थे। सिल्वर स्क्रीन पर उनका होना ही फिल्म की सफलता की गारंटी हुआ करता था। चाहे ‘क्रांतिवीर’ का प्रतापी प्रताप हो या ‘अग्निसाक्षी’ का खूंखार पति, उनके किरदारों ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। उनकी संवाद अदायगी (डायलॉग डिलीवरी) का तरीका ऐसा था, जिसे उनके अलावा कोई दूसरा कलाकार कभी पर्दे पर जीवंत नहीं कर सकता। नाना पाटेकर की फिल्मों का जिक्र आते ही उनके वे तेवर और तीखे संवाद याद आ जाते हैं जो समाज के कड़वे सच को आईना दिखाते थे। वीडियो क्लिप में उनके द्वारा बोले गए उस ऐतिहासिक और मार्मिक दृश्य ने एक बार फिर सभी को झकझोर कर रख दिया है, जिसमें इंसानियत और मजहब के फर्क को बड़े ही कड़े शब्दों में उजागर किया गया है:
“इन मासूमों के दिल में इस बचपन से तू दुश्मनी का बीज बो रहा है… बता! इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा? साले बनाने वाले ने इसमें फर्क नहीं किया, तू कौन होता है फर्क करने वाला!” यह संवाद आज भी उतना ही प्रासंगिक है और नाना पाटेकर की उस बेखौफ शैली को बयां करता है जो अन्याय के खिलाफ हमेशा सीना तानकर खड़ी रहती थी। नाना पाटेकर के अचानक चले जाने से बॉलीवुड में मातम पसर गया है।
उनके चाहने वाले सोशल मीडिया पर नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
भले ही नाना पाटेकर शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए गए किरदार और उनके विचार हमेशा अमर रहेंगे।
क्या आपको नाना पाटेकर की कोई ऐसी फिल्म या उनका कोई खास डायलॉग याद है जो आपके दिल के सबसे करीब हो!
