महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए बनेगी राज्यस्तरीय ‘लिविंग लैब’

AI, डिजिटल हेल्थ और डेटा तकनीक का होगा इस्तेमाल, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर भी जोर


मुंबई। महाराष्ट्र के ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ लक्ष्य को और मजबूत करने के लिए राज्य में स्वास्थ्य नवाचार और गुणवत्ता सुधार की दिशा में राज्यस्तरीय ‘लिविंग लैब’ विकसित की जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना से शुरू इस पहल के जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर और गुणवत्ता मानकों में सुधार के साथ नागरिकों के लिए कौशल विकास तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जाएगा। ‘लिविंग लैब’ का उद्देश्य स्थानीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं की पहचान करना, समुदायों की भागीदारी से जरूरत के मुताबिक समाधान विकसित करना और वास्तविक स्वास्थ्य व्यवस्था में नई पद्धतियों का परीक्षण करना है। इसके लिए सरकार, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों, नवोन्मेषकों और विकास भागीदारों के अनुभव तथा क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इस पहल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल हेल्थ, डेटा और ‘प्रिसिजन हेल्थ’ जैसी आधुनिक तकनीकों और नवाचार का भी उपयोग किया जाएगा। प्रयास यह होगा कि मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था और उपचार प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू निजी स्वास्थ्य क्षेत्र की क्षमता को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं से जोड़ना है। विभिन्न भागीदारों की सहभागिता से स्थानीय जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक, किफायती और आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य समाधान विकसित किए जाएंगे। सफल समाधानों को महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों और आवश्यकता के अनुसार अन्य स्थानों तक विस्तारित करने की संभावनाओं का भी आकलन किया जाएगा। योजना के अगले चरणों में समुदाय की स्वास्थ्य जरूरतों से जुड़े स्थानीय कौशल विकास, रोजगार और नए उद्यमों के निर्माण की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। इस अवधारणा में केवल नई तकनीक अपनाने के बजाय उसका लाभ दूरदराज और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित वर्गों सहित प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार, समुदाय, नवोन्मेषकों और भागीदारों के सहयोग से प्रभावी समाधानों का परीक्षण किया जाएगा और उनसे मिले अनुभवों के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा समान उपलब्धता में सुधार करने वाले उपायों का विस्तार किया जाएगा। ‘लिविंग लैब’ को साक्ष्य निर्माण और सहयोग के साझा मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें समुदाय की जरूरतों और स्थानीय भागीदारी को केंद्र में रखते हुए नवाचार, स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रत्यक्ष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले विभिन्न घटकों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा। द फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया का ‘मान्यता’ कार्यक्रम इस दृष्टिकोण का प्रारंभिक उदाहरण है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में यह पहल दिखाती है कि निजी क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के मॉडल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ किस तरह काम कर सकते हैं। वहीं ‘MSD for Mothers’ इस पहल में समन्वय करते हुए सहयोगी मॉडल के विकास के लिए विभिन्न भागीदारों को एक साथ ला रहा है। इसके जरिए नवाचार को व्यावहारिक और टिकाऊ समाधानों में बदलकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

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