महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के बड़े फैसले: पुलिसकर्मियों को मिलेगा ‘मुख्यमंत्री शौर्य पदक’, हिरासत में मौत पर ₹5 लाख मुआवजा
वडार समाज को खनन में राहत, ‘CM-SRISTHI’ से शोध को बढ़ावा, स्वाधार और स्वयंम योजनाओं का अनुदान बढ़ा, छात्रावास कर्मियों का मानधन भी दोगुना

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में पुलिसकर्मियों, विद्यार्थियों, वडार समाज और उच्च शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। राज्य पुलिस बल में साहसिक कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को अब ‘मुख्यमंत्री शौर्य पदक’ दिया जाएगा। वहीं पुलिस हिरासत में मारपीट, अत्याचार या दबाव के कारण मृत्यु होने की पुष्टि पर मृतक के निकटतम वारिस को ₹5 लाख मुआवजा देने की नीति को भी मंजूरी दी गई है।
बहादुर पुलिसकर्मियों को ₹50 हजार के साथ शौर्य पदक
कर्तव्य निभाते समय जोखिम उठाकर साहसिक प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ₹50 हजार नकद, मुख्यमंत्री शौर्य पदक और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। हर वर्ष महाराष्ट्र दिवस यानी 1 मई की पूर्व संध्या पर पदकों की घोषणा की जाएगी। पदकों की संख्या पहले से निश्चित नहीं होगी और यह राज्यभर से मिलने वाले प्रस्तावों तथा कार्यों के मूल्यांकन पर निर्भर करेगी।
माओवाद, आतंकवाद, सांप्रदायिक दंगे, संगठित अपराध, तस्करी और आंतरिक सुरक्षा जैसी परिस्थितियों में साहस दिखाने वाले पुलिसकर्मियों के कार्यों को इस सम्मान के लिए विचार में लिया जाएगा। मरणोपरांत भी मुख्यमंत्री शौर्य पदक देने का प्रावधान किया गया है। पुरस्कार के चयन के लिए पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में पहली चयन समिति होगी। इसके बाद गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति प्रस्तावों पर विचार करेगी और अंतिम प्रस्ताव गृहमंत्री तथा मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
पुलिस हिरासत में मौत पर ₹5 लाख मुआवजा
मंत्रिमंडल ने पुलिस हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत होने की स्थिति में उसके निकटतम वारिस को मुआवजा देने की नीति को मंजूरी दी है। यदि जांच में यह निष्कर्ष निकलता है कि पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की मारपीट, अत्याचार अथवा दबाव के कारण मौत हुई, तो परिवार को ₹5 लाख दिए जाएंगे। शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना के कारण 50 प्रतिशत से कम स्थायी दिव्यांगता पर ₹2 लाख और 50 प्रतिशत या उससे अधिक स्थायी दिव्यांगता पर ₹4 लाख मुआवजा दिया जाएगा। प्राकृतिक मृत्यु, हिरासत से पहले की पुरानी असाध्य बीमारी, अचानक प्राकृतिक आपदा, स्वयं चिकित्सा लेने से इनकार, हिरासत से भागने के दौरान दुर्घटना अथवा अनुचित मांग को लेकर भूख हड़ताल या इलाज से इनकार के कारण हुई मृत्यु जैसी परिस्थितियों में मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
ऐसी घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त को 30 दिनों के भीतर संज्ञान लेकर प्रस्ताव पेश करना होगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का भी प्रावधान है। लापरवाही साबित होने पर मुआवजे की रकम संबंधित दोषी अधिकारी या कर्मचारी के वेतन, पेंशन अथवा संपत्ति से वसूल की जा सकेगी।
वडार समाज को बड़ी राहत, 500 ब्रास तक खनन पर रॉयल्टी में छूट
पारंपरिक रूप से पत्थर तोड़ने और गौण खनिज निकालकर आजीविका चलाने वाले वडार समाज के लिए वार्षिक खनन सीमा 200 ब्रास से बढ़ाकर 500 ब्रास करने को मंजूरी दी गई है। इसके लिए महाराष्ट्र भूमि राजस्व (गौण खनिजों का उत्खनन एवं निकासी) नियम, 1968 में संशोधन किया जाएगा। अब तक पारंपरिक रूप से हाथ से पत्थर तोड़ने वाले वडार परिवार निजी जमीन अथवा गैर-मूल्यांकित सरकारी बंजर भूमि से सालाना 200 ब्रास तक पत्थर और मिट्टी बिना रॉयल्टी निकाल सकते थे। डीजल, मजदूरी, परिवहन और औजारों की बढ़ती लागत को देखते हुए यह सीमा 500 ब्रास करने का निर्णय लिया गया है।
उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए ‘CM-SRISTHI’ योजना
राज्य के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी विकास को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने CM-SRISTHI (Scheme for Research, Innovations and Technological Hubs in Higher Education Institutions) लागू करने की मंजूरी दी है। योजना की अवधि 2026-27 से 2030-31 तक होगी।
इसके तहत सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों, सरकारी पॉलिटेक्निक, इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी मुंबई, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोणेरे में शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना में डीप टेक, फ्रंटियर टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिसर्च पार्क, उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी और Industry 5.0 के अनुरूप पाठ्यक्रम पर जोर रहेगा। विदेशी विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्वाधार योजना में अब सालाना ₹80 हजार तक अनुदान
अनुसूचित जाति और नवबौद्ध वर्ग के ऐसे विद्यार्थी जिन्हें पात्र होने के बावजूद सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता, उनके लिए संचालित भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्वाधार योजना की सहायता राशि बढ़ाने को भी मंजूरी मिली है।
मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, नवी मुंबई, ठाणे और नागपुर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब ₹80 हजार सालाना मिलेंगे। इसमें ₹42 हजार भोजन, ₹28 हजार आवास और ₹10 हजार निर्वाह भत्ता शामिल है। अन्य राजस्व संभागीय शहरों और ‘क’ श्रेणी महानगरपालिका क्षेत्रों में ₹68 हजार, अन्य जिला मुख्यालयों तथा महानगरपालिका सीमा से पांच किलोमीटर तक स्थित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वालों को ₹57 हजार और तालुका स्तर पर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ₹50 हजार सालाना दिए जाएंगे। मेडिकल और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री के लिए अतिरिक्त ₹8 हजार, जबकि अन्य पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को ₹4 हजार सालाना मिलेंगे।
2,388 छात्रावासों के कर्मचारियों का मानधन बढ़ा
अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित राज्य के 2,388 अनुदानित छात्रावासों के अधीक्षक, रसोइया, सहायक और चौकीदार के मानधन में भी वृद्धि की गई है। इन छात्रावासों की कुल क्षमता 99,852 विद्यार्थियों की है।
महानगर क्षेत्रों तथा ‘अ’ और ‘ब’ श्रेणी महानगरपालिका क्षेत्रों में अधीक्षक का मानधन ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹20 हजार, रसोइये का ₹8,500 से ₹17 हजार तथा सहायक और चौकीदार का ₹7,500 से बढ़ाकर ₹15 हजार किया जाएगा।
अन्य क्षेत्रों में अधीक्षक को ₹15 हजार, रसोइये को ₹12 हजार और सहायक तथा चौकीदार को ₹10-10 हजार मिलेंगे। छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए छात्रावासों में महिला अधीक्षक और 24 घंटे चौकीदार की उपलब्धता अनिवार्य की गई है।
आदिवासी विद्यार्थियों की ‘स्वयंम योजना’ में भी बढ़ा भत्ता
अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयंम योजना के भत्तों में भी संशोधन किया गया है। सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं पाने वाले पात्र विद्यार्थियों को भोजन, आवास और निर्वाह के लिए राशि DBT के जरिए बैंक खाते में दी जाती है। मुंबई, मुंबई उपनगर, नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, पिंपरी-चिंचवड और नागपुर में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कुल सहायता ₹60 हजार से बढ़ाकर ₹80 हजार सालाना की गई है। अन्य राजस्व संभागीय मुख्यालयों और ‘क’ श्रेणी महानगरपालिका क्षेत्रों में सहायता ₹51 हजार से बढ़ाकर ₹68 हजार होगी। अन्य जिला क्षेत्रों में विद्यार्थियों को ₹57 हजार और अन्य स्थानों पर पढ़ने वालों को ₹50 हजार सालाना दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त मेडिकल और इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री के लिए ₹8 हजार तथा अन्य शाखाओं के विद्यार्थियों को ₹4 हजार सालाना अलग से दिए जाएंगे।
