
मुंबई। मुंबई पुलिस ने अवैध इमिग्रेशन और उससे जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत 1 जनवरी से अब तक लगभग 450 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इनमें से करीब 224 लोगों को डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि कई अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक हिरासत या डिटेंशन सेंटर में रखे गए हैं। हालिया कार्रवाई में वर्सोवा पुलिस ने 23 लोगों को हिरासत में लिया, जिन पर ट्रैफिक सिग्नल और धार्मिक स्थलों पर भीख मांगने के आरोप हैं। जांच में सामने आया कि ये लोग मालवानी और मलाड के किराये के मकानों में रह रहे थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई 5 फरवरी से शुरू हुई, जब एंटी-ट्रैफिकिंग सेल (एटीसी) की टीम ने वर्सोवा दरगाह के पास छापा मारकर 18 लोगों को हिरासत में लिया। इसके बाद 18 फरवरी को पांच और लोगों को पकड़ा गया। इस वर्ष अब तक वर्सोवा पुलिस कुल 27 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में ले चुकी है, जिनमें से 26 को डिपोर्ट किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की कार्रवाई में 1,061 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। 27 मार्च तक के पुलिस स्टेशन-वार आंकड़ों के अनुसार, डिपोर्टेशन का इंतजार कर रहे लोगों की संख्या कुर्ला (11), बांद्रा (10), देवनार (7) और पवई (6) में सबसे अधिक है। इसके अलावा अंबोली, नागपाड़ा, ओशिवारा और पार्क साइट समेत कई क्षेत्रों में पांच-पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सांताक्रूज़, भायखला, ट्रॉम्बे और शिवाजी पार्क में चार-चार लोग हिरासत में हैं। इसके अलावा दादर, वडाला, साकीनाका, कोलाबा, चेंबूर, घाटकोपर, गोवंडी, मालाबार हिल सहित कई इलाकों में भी मामले सामने आए हैं, जिससे अभियान की व्यापकता स्पष्ट होती है। डिपोर्टेशन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी है। 27 मार्च को 51 लोगों को डिपोर्ट किया गया, जिनमें 20 मुंबई के थे। 29 मार्च को 44 लोगों के डिपोर्टेशन की योजना थी, लेकिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने छह लोगों के देश-निकाले पर रोक लगा दी। इसके बाद 5 अप्रैल को मुंबई से 50 और नवी मुंबई से पांच लोगों को डिपोर्ट किया गया। हालांकि, कई मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप के चलते डिपोर्टेशन प्रक्रिया में देरी हुई है। एंटॉप हिल, चुनाभट्टी और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मामलों में अदालतों ने अगली सुनवाई तक देश-निकाले पर रोक लगाई है। वर्सोवा मामले में सत्र न्यायालय ने सजा पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 21 मई 2026 निर्धारित की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, जिसमें अवैध निवासियों की पहचान करते हुए प्रत्येक मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।




