मराठी को 21वीं सदी की डिजिटल और ज्ञान भाषा बनाएंगे: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ का मुंबई में शुभारंभ, AI, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी में मराठी का उपयोग बढ़ाने का आह्वान

मुंबई। मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने की पृष्ठभूमि में शनिवार को आयोजित ‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ और ‘अभिजात मराठी भाषा सम्मान दिवस’ कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चर्चगेट स्थित श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकर्सी महिला विश्वविद्यालय के पाटकर सभागृह में किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मराठी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति की वाहक और गौरवशाली इतिहास की साक्षी है। विपुल शब्द-संपदा, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और विभिन्न बोलियों की विरासत से संपन्न मराठी को 21वीं सदी में डिजिटल और ज्ञान भाषा के रूप में और अधिक सक्षम बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दैनिक व्यवहार में मराठी का उपयोग बढ़ाने के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी मराठी का इस्तेमाल बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मराठी प्राचीन और अभिजात भाषा है तथा केंद्र सरकार से इसे अभिजात भाषा की आधिकारिक मान्यता मिलना मराठी भाषियों के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने से महाराष्ट्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वराज्य की संकल्पना के साथ स्वभाषा को भी महत्व दिया था। राज्य के कामकाज में मराठी का उपयोग बढ़ाने के उनके प्रयासों ने प्रशासनिक स्तर पर मराठी के इस्तेमाल को नई दिशा दी। फडणवीस ने कहा कि मराठी की समृद्ध शब्द-संपदा केवल गौरव का विषय बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका आधुनिक ज्ञान के निर्माण में भी प्रभावी इस्तेमाल होना चाहिए। विज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था, शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी अवधारणाएं मराठी में उपलब्ध होंगी तो मराठी सही मायने में ज्ञान भाषा बन सकेगी। उन्होंने प्रमाण मराठी के साथ महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोलियों को भी मराठी भाषा की अमूल्य धरोहर बताया। कोंकणी, वऱ्हाडी, खानदेशी-अहिराणी, मालवणी, डांगी और झाडीबोली जैसी बोलियों में स्थानीय संस्कृति, लोकपरंपराएं और जीवन के अनुभव समाहित हैं। उन्होंने इन बोलियों के साहित्य, लोकपरंपराओं और भाषाई विशेषताओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मराठी भाषा एवं उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत, मुंबई की महापौर रितु तावडे, विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. हेमलता बागला, मराठी भाषा विभाग के सचिव किरण कुलकर्णी सहित गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में मराठी भाषा प्रेमी उपस्थित रहे।
