‘यूपी में बेटियां सुरक्षित नहीं, जनता सरकार को उखाड़ फेंकेगी’: आराधना मिश्रा ‘मोना’
कांग्रेस की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने महिला अपराध और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट की यूपी पुलिस पर तल्ख टिप्पणी का भी किया जिक्र

लखनऊ, उत्तर प्रदेश। कांग्रेस की नवनियुक्त उत्तर प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराधों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश बेटियों के लिए असुरक्षित होता जा रहा है और स्कूल, सड़क से लेकर घर तक उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका यह बयान 4 अक्टूबर को सामने आया है। आराधना मिश्रा ने पिछले एक सप्ताह में बुलंदशहर, बस्ती, बांदा, सोनभद्र, कौशाम्बी, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज और लखनऊ में सामने आई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सवाल केवल कुछ घटनाओं का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का है।उन्होंने कहा कि बेटियां डर के माहौल में नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा के साथ जीना चाहती हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि एक वर्ष में उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 66,381 मामले दर्ज हुए, यानी औसतन करीब 182 मामले प्रतिदिन। उन्होंने इसी अवधि में दुष्कर्म के 3,516, हत्या के 3,206 और एसिड अटैक के 31 मामले दर्ज होने का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े उनके जारी बयान में दिए गए हैं। आराधना मिश्रा ने कहा कि जब पांच और दस वर्ष की बच्चियों से लेकर नाबालिग छात्राओं तक की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तब सरकार को जवाब देना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो सत्ता बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सड़क और घर नहीं दे सकती, उस सरकार को जनता उखाड़ फेंकेगी।” यह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का राजनीतिक बयान है। उन्होंने 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर की गई कड़ी टिप्पणी का भी उल्लेख किया। उस मामले में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने एक आपराधिक जांच में कथित गंभीर अनियमितताओं पर नाराजगी जताई थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से यूपी पुलिस को भंग करने और जांच सीबीआई को सौंपने जैसी तल्ख टिप्पणी की थी। आराधना मिश्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा केवल नारे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून-व्यवस्था को प्रभावी बनाने और अपराध के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
