शिवाजी पार्क में CJP के प्रदर्शन पर विवाद, अभिजीत दिपके समेत चार के खिलाफ पुलिस में शिकायत

वकील सिद्धि देवलेकर ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शन और भीड़ जुटाने का लगाया आरोप, बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का दिया हवाला

मुंबई। चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिवाजी पार्क निवासी एवं अधिवक्ता सिद्धि देवलेकर ने शुक्रवार को शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में CJP से जुड़े अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका, सौरव दास और रत्ना सिंह समेत अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शन आगे बढ़ाने और बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की कोशिश की गई। देवलेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी शिकायत की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने शिवाजी पार्क के एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर पुलिस से शिकायत की है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की PIL 116/2009 में 4 जनवरी 2013 के फैसले और उसके बाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी आदेश से जुड़ी पाबंदियों का भी हवाला दिया है। देवलेकर ने प्रदर्शन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया कि इसे केवल शांतिपूर्ण विरोध के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह राजनीतिक विरोध की आड़ में कानून की अवहेलना का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि संविधान की रक्षा की बात करने वाले लोग अदालत द्वारा लगाई गई पाबंदियों की अनदेखी कैसे कर सकते हैं। यह देवलेकर का आरोप है; शिकायत पर पुलिस की आगे की कार्रवाई और कानूनी निष्कर्ष अभी सामने आने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि अदालत से जुड़ी पाबंदियों के उल्लंघन को शांतिपूर्ण गतिविधि बताकर नजरअंदाज किया जाता है, तो इससे गलत उदाहरण स्थापित हो सकता है। देवलेकर के मुताबिक, कोई विचारधारा, राजनीतिक अभियान या व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने प्रदर्शन को बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का अपमान भी बताया। दरअसल, शुक्रवार को CJP और अन्य नागरिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने शिवाजी पार्क में चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप प्रदर्शनकारियों के दावे हैं। अब इस प्रदर्शन को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद मामला नए विवाद में घिर गया है। हालांकि, शिकायत दर्ज कराया जाना अपने आप में आरोपों के साबित होने या एफआईआर दर्ज होने के समान नहीं है।

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