रिश्वत का ‘NOC’ वाला धंधा: CPWD इंजीनियर ने जमीन पर दावा छोड़ने के लिए मांगे 70 लाख, CBI ने 50 लाख के साथ पकड़ा

इंद्र यादव/नवी मुंबई। देश में ‘नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ यानी NOC का मतलब अब साफ हो गया है—‘नोट्स ऑफ करप्शन’। सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD), मुंबई के एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने एक रियल एस्टेट समूह से ‘हमारा कोई दावा नहीं’ वाला NOC देने के एवज में कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की। बातचीत के बाद यह रकम 70 लाख रुपये तय हुई। CBI ने जाल बिछाया और इंजीनियर के रिश्तेदार के जरिए दिए जा रहे 50 लाख रुपये नकद के साथ आरोपियों को पकड़ लिया। बाकी 20 लाख रुपये अगले सप्ताह दिए जाने थे।मामला वडाला की उस जमीन से जुड़ा है, जिस पर एक रियल एस्टेट समूह निर्माण शुरू करना चाहता था। आरोप है कि इंजीनियर ने पुणे में रहने वाले अपने रिश्तेदार को बिचौलिया बनाकर रिश्वत की मांग रखी। कथित तौर पर संदेश साफ था—NOC चाहिए तो पैसा देना होगा, अन्यथा जमीन पर CPWD का दावा बना रहेगा। रिश्तेदार ने 50 लाख रुपये का लेन-देन किया, जबकि इंजीनियर नवी मुंबई के वाशी में रिश्वत की रकम पहुंचने का इंतजार कर रहा था। CBI ने कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया। इसके साथ ही रियल एस्टेट समूह के वाइस प्रेसिडेंट, एक मैनेजर और NOC चाहने वाली फर्म के पार्टनर को भी गिरफ्तार किया गया। इस तरह मामले में कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई। मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि 50 लाख रुपये की रकम मिलने के बाद NOC जारी कर दी गई, लेकिन कथित तौर पर डिस्पैच रजिस्टर में उसकी एंट्री तक नहीं की गई। यानी सरकारी रिकॉर्ड में प्रक्रिया दर्ज नहीं हुई, जबकि NOC जारी हो गई। बाकी 20 लाख रुपये बाद में दिए जाने थे। CBI की तलाशी के दौरान मुंबई, नवी मुंबई और पुणे स्थित ठिकानों से कथित तौर पर अतिरिक्त 53.87 लाख रुपये नकद, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य कागजात बरामद हुए। इसके अलावा रिश्वत के रूप में दिए गए 50 लाख रुपये भी अलग से जब्त किए गए हैं।गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को मुंबई की CBI विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगी।यह मामला सरकारी दफ्तरों में NOC जैसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की आशंका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोपों के मुताबिक, जमीन पर सरकारी दावा छोड़ने के लिए मोटी रकम मांगी गई और रकम का एक हिस्सा मिलते ही NOC जारी कर दी गई। यदि जांच में ये आरोप साबित होते हैं तो यह केवल रिश्वत लेने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी प्रक्रिया और रिकॉर्ड को कथित रूप से दरकिनार करने का भी गंभीर मामला होगा। CBI की कार्रवाई ने फिलहाल कथित रिश्वत के इस लेन-देन को रोक दिया है। अब जांच में यह सामने आना महत्वपूर्ण होगा कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल था, NOC जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का किस स्तर पर उल्लंघन हुआ और बरामद नकदी तथा संपत्ति संबंधी दस्तावेजों का स्रोत क्या है।

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