मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवाजी पार्क में CJP का प्रदर्शन
पोस्टर, व्यंग्य और नारों के साथ जुटे प्रदर्शनकारी, चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर उठाए सवाल

मुंबई। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आह्वान पर शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठाए। मुंबई पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क पहुंचे। प्रदर्शन में व्यंग्यात्मक पोस्टर, अनोखी वेशभूषा और संगीत के साथ नारेबाजी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने फिल्मों के चर्चित संवादों और इंटरनेट मीम्स की शैली में अपनी बात रखी। कई पोस्टरों पर ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करने वाले संदेश लिखे गए थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए कुछ तीखे नारे भी मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाते हुए लगाए गए। कार्यक्रम शाम करीब चार बजे शुरू होना था, लेकिन इससे पहले ही लोग अलग-अलग रास्तों से शिवाजी पार्क पहुंचने लगे थे। पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई थी और दादर स्टेशन के आसपास भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रदर्शन से पहले कुछ स्थानीय लोगों ने शिवाजी पार्क में इस आयोजन को लेकर आपत्ति भी जताई थी। प्रदर्शन में छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हुए। पुणे से आए कुछ प्रदर्शनकारी वाद्ययंत्रों के साथ नारे लगाते दिखाई दिए। सभा में तिरंगे के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को दोहराया। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने प्रदर्शन में भाग लिया। गांधी जयंती के दिन आयोजित इस प्रदर्शन को CJP ने अपने देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत के रूप में पेश किया है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के अलावा मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग भी रखी है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाने की घोषणा की है। इस प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी और संगीतकार विशाल ददलानी सहित कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियां भी शामिल हुईं। CJP और प्रदर्शनकारियों द्वारा चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोप उनके दावे हैं। चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
