
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर राज्य को कमजोर करने और उसे बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाना एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक पुनर्गठन का रास्ता बनाना है। कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में धरना स्थल से संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा चालाकी से बंगाल को बांटने की कोशिश कर रही है और बंगाल व बिहार के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस संशोधित मतदाता सूची के विरोध में धरना दे रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह साजिश सफल नहीं होगी क्योंकि बंगाल अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा करना जानता है। केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार ने अपनी सीमाएं पार कीं तो विपक्ष दिल्ली में उसकी सरकार गिराने का प्रयास करेगा। इसी मंच से उन्होंने यह भी घोषणा की कि ‘युवा साथी’ योजना के तहत पात्र युवाओं के बैंक खातों में भुगतान शनिवार से शुरू हो जाएगा। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने हाल में राज्यपालों के बदलाव और बिहार की राजनीतिक स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के इस्तीफे और उनकी जगह आर. एन. रवि की नियुक्ति पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ का भी उल्लेख किया। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार बिना किसी राजनीतिक या नैतिक सीमाओं के काम कर रही है और क्षेत्रीय सहयोगियों के समर्थन से सत्ता में बनी हुई है। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा को अपने सहयोगियों के समर्थन से ही ताकत मिल रही है। उन्होंने भाजपा पर निगरानी तकनीकों के इस्तेमाल और राजनीतिक दबाव बनाने का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार वोटर लिस्ट से नाम हटाकर बंगाल को विभाजित नहीं किया जा सकता। यह विवाद उस समय तेज हुआ जब 28 फरवरी को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई। भारतीय निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में फिलहाल 7,04,59,284 पंजीकृत मतदाता हैं। मतदाता सूची संशोधन को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है। लगभग 60 लाख मतदाता अभी भी ‘अंडर जजमेंट’ श्रेणी में हैं और उनके दस्तावेजों की जांच जारी है, जबकि करीब 5.80 लाख एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किए गए थे। नई सूची में 1,82,036 नए मतदाता जोड़े गए हैं। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कई संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटने के पैटर्न से मताधिकार छिनने की आशंका पैदा हो रही है। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव के रूप में उभरता दिख रहा है।




