
मुंबई। बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में उपयोग किए जा रहे विभिन्न रंगों में मौजूद हानिकारक तत्वों के मुद्दे पर राज्य सरकार गंभीर हो गई है। इस विषय पर चर्चा कर खाद्य रंगों को लेकर राज्य की नीति तय करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में विधानसभा के इस विषय के जानकार सदस्यों को भी आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार के कानूनों में आवश्यक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया जाएगा। गुरुवार को यह जानकारी अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ ने विधानसभा में दी। विधानसभा में सदस्य महेश शिंदे ने खाद्य पदार्थों में रासायनिक प्रक्रिया से तैयार किए जा रहे हानिकारक कृत्रिम रंगों के उपयोग का मुद्दा उठाते हुए आधे घंटे की चर्चा कराई। इस चर्चा में सदस्य विक्रम पाचपुते, सुधीर मुनगंटीवार, प्रवीण दटके, राजेश पवार और हिरामन खोसकर ने भी भाग लिया। मंत्री नरहरी झिरवाळ ने बताया कि अन्न व औषध प्रशासन विभाग से संबंधित कानून केंद्र सरकार के अधीन हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों में उपयोग किए जा रहे हानिकारक रंगों और उनके घटकों पर नियंत्रण के लिए कानूनों में आवश्यक बदलाव करने हेतु राज्य सरकार की ओर से प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में खाद्य रंगों के संबंध में राज्य की नीति तय करने पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से सभी होटलों को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने मेन्यू में खाद्य पदार्थों में उपयोग किए जाने वाले सभी घटकों का स्पष्ट उल्लेख करें। इस निर्देश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्री झिरवाळ ने बताया कि वर्तमान में राज्य में अन्न व औषध प्रशासन विभाग की तीन प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा तीन नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री से अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने सदस्य महेश शिंदे से इस विषय पर प्रस्तुत अध्ययन आधारित जानकारी को पुस्तिका के रूप में तैयार करने का सुझाव दिया और कहा कि विभाग इस कार्य में सहयोग करेगा। साथ ही विभिन्न माध्यमों से जनजागृति अभियान भी चलाया जाएगा।




