
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मराठी को ज्ञानभाषा बनाने का संकल्प
मुंबई। मराठी भाषा गौरव दिवस के अवसर पर विधानभवन के केंद्रीय सभागार में आयोजित ‘जावे विनोदाच्या गावा’ विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठी को ज्ञानभाषा के रूप में विकसित करने का संकल्प व्यक्त किया। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जो भाषाएं ज्ञान, प्रशासन और रोजगार की भाषा बनती हैं, वही आगे बढ़ती हैं। इसलिए अभिजात मराठी को समृद्ध कर उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में विधान परिषद सभापति प्रोफेसर राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष अधिवक्ता राहुल नार्वेकर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, विधान परिषद उपसभापति डॉ. नीलम गोरे, विधानसभा उपाध्यक्ष अन्ना बनसोडे, संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार, मराठी भाषा समिति प्रमुख आशुतोष काले तथा विधिमंडल सचिवालय के सचिव जितेंद्र भोले सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने समय में मराठी भाषा की शुद्धता के लिए शब्दकोश तैयार कराया। उस दौर में प्रशासन में फारसी और अरबी का प्रभाव था, किंतु शिवाजी महाराज ने मराठी के संरक्षण और शुद्धीकरण का कार्य किया। उन्होंने कहा कि मराठी का गौरव शिवाजी महाराज से ही प्रारंभ होता है और प्रारंभिक ग्रंथों से इसकी अभिजात परंपरा स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिए जाने से भाषा को विशेष संरक्षण मिला है। मराठी भाषा, साहित्य और लोककला को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान भी उन्होंने किया।
तकनीक और शोध मराठी में हों – राहुल नार्वेकर
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि यदि मराठी को वास्तविक अर्थों में ज्ञानभाषा बनाना है तो तकनीक और शोध का कार्य भी मराठी में होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मराठी देश की 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक है और देश में 1,652 बोलियां प्रचलित हैं। मराठी भाषी जनसंख्या देश में तीसरे तथा विश्व में दसवें स्थान पर है। शासन स्तर पर इसके संवर्धन के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।
संकट में भी हास्य खोजने वाला ही सच्चा मराठी – एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी व्यक्ति के स्वभाव में विनोद रचा-बसा है। उन्होंने आचार्य अत्रे और पु. ल. देशपांडे को मराठी हास्य साहित्य के दो महान शिखर बताते हुए कहा कि संकट में भी हास्य खोज लेने वाला ही सच्चा मराठी है। उन्होंने मराठी का प्रयोग सभी क्षेत्रों में व्यवहार की भाषा के रूप में करने का आह्वान किया।
डिजिटल माध्यमों में मराठी का अधिक उपयोग हो – सुनेत्रा अजित पवार
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर मराठी का अधिकाधिक उपयोग आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि लंदन में प्रस्तावित महाराष्ट्र भवन के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये की निधि प्रदान की गई है तथा सार्वजनिक पुस्तकालयों को भी बढ़ा हुआ अनुदान दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभिजात भाषा का दर्जा मराठी को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने में सहायक होगा। कार्यक्रम का प्रास्ताविक डॉ. नीलम गोरे ने किया तथा आभार प्रदर्शन आशुतोष काले ने किया। इस अवसर पर ‘लोकसेवेचा लोकजागर’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन जनसंपर्क अधिकारी निलेश मदाने ने किया और प्रस्तुति देने वाले कलाकारों का सम्मान किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में विनोदी कविताएं, व्यंग्य गीत और मराठी अभिमान गीत प्रस्तुत किए गए। गायक श्रीरंग भावे और गायिका अदिति प्रभुदेसाई ने गीत प्रस्तुत किए। ‘लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी’ गीत, जिसे सुरेश भट ने लिखा और कौशल इनामदार ने संगीतबद्ध किया, विशेष आकर्षण रहा। अभिनेता ऋषिकेश जोशी ने पु. ल. देशपांडे के विनोदी लेख का वाचन किया, जबकि निर्देशक केदार शिंदे ने जयवंत दळवी के लेख ‘जगी हा खास वेड्यांचा पसारा’ और मंगेश पाडगांवकर की कविता का पाठ किया। वहीं वि. दा. करंदीकर की कविता ‘साठीचा गजर’ का भी वाचन किया गया। महाराष्ट्र साहित्य परिषद के कार्याध्यक्ष मिलिंद जोशी ने आचार्य अत्रे और पु. ल. देशपांडे के जीवन एवं साहित्यिक योगदान पर व्याख्यान दिया। मराठी भाषा गौरव दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में मराठी भाषा, साहित्य और लोकसंस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन का संदेश देते हुए मराठी को ज्ञान और रोजगार की सशक्त भाषा बनाने का संकल्प दोहराया गया।



