मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का आंदोलन तेज, 2 अक्टूबर को मुंबई में ‘जेल भरो’ का ऐलान

शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की मुंबई पुलिस ने नहीं दी अनुमति, गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता और रांची तक आंदोलन ले जाने की तैयारी

मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने आंदोलन को देश के कई शहरों तक ले जाने की घोषणा की है। पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ करने का ऐलान किया है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। गुरुवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। CJP ने चुनाव आयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता की मांग भी उठाई है। पार्टी नेताओं के मुताबिक आंदोलन मुंबई से शुरू होकर अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। CJP नेताओं ने गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता सहित अन्य शहरों में भी आंदोलन की योजना बताई है। पार्टी की योजना अभियान को आगे चलकर दिल्ली तक ले जाने की है। दिपके ने राजनीतिक दलों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है, हालांकि CJP ने अपने अभियान को विपक्षी दलों के विरोध कार्यक्रमों से स्वतंत्र रखने की बात कही है। आयोजकों ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से राजनीतिक दलों के झंडे और बैनर के बजाय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर आने की अपील की है। इस बीच, शिवाजी पार्क में आंदोलन को लेकर मुंबई पुलिस की अनुमति नहीं मिलने से विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ने अपने पत्र में बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के आदेश, शिवाजी पार्क के उपयोग से जुड़ी पाबंदियों, आवश्यक BMC अनुमति नहीं होने, इलाके के रिहायशी एवं साइलेंस जोन होने तथा संभावित शोर और ट्रैफिक की समस्या जैसे कारणों का उल्लेख किया है। पुलिस का कहना है कि भीड़ और यातायात के कारण आसपास के अस्पतालों तक आवागमन भी प्रभावित हो सकता है। आयोजकों को वैकल्पिक स्थान चुनने की सलाह दी गई है। अनुमति नहीं मिलने के बाद दिपके ने गांधी जयंती पर ‘जेल भरो आंदोलन’ करने की घोषणा की। उन्होंने कहा है कि प्रदर्शन को रोका गया तो आंदोलनकारी स्वैच्छिक गिरफ्तारी देंगे। CJP का यह अभियान मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर कथित आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच शुरू हुआ है। हाल की रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा दस महीनों में मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न कदमों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराने की बात सामने आई थी। चुनाव आयोग ने संस्थागत कामकाज में मतभेद की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा है कि विचारों का अंतर सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा है और महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने मतदाता सूची सॉफ्टवेयर की समीक्षा भी शुरू की है। CJP ने ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम बाहर होने की रिपोर्टों पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया की निष्पक्षता पर चिंता जताई है। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से किसी नाम का बाहर होना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित पात्र मतदाता का मतदान अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो गया है।

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