अदार पूनावाला के खिलाफ आपत्तिजनक वीडियो हटाने का X Corp को बॉम्बे हाई कोर्ट का निर्देश
चार प्रतिवादियों को कारण बताओ नोटिस, कोर्ट ने कहा— इंटरमीडियरी नहीं निभा सकता ‘न्यायकर्ता या सेंसर’ की भूमिका

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने X Corp को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के CEO अदार पूनावाला के खिलाफ आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री वाले एक नए वीडियो को हटाने या डिलीट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चार प्रतिवादियों को अपने पहले के आदेश का कथित उल्लंघन करने के मामले में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। जस्टिस गौरी गोडसे ने 29 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर योहान टेंगरा द्वारा अपलोड किए गए वीडियो को हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने टेंगरा और तीन अन्य लोगों को नोटिस जारी कर पूछा है कि 5 जून 2023 के आदेश का पालन नहीं करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। जून 2023 में हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को पूनावाला और सीरम इंस्टीट्यूट के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया था। साथ ही आपत्तिजनक सामग्री हटाने और बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश भी दिया गया था। अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि टेंगरा ने उसी रात एक और वीडियो अपलोड किया, जिसमें उसने आदेश का पालन नहीं करने की बात कही। नए वीडियो में कथित तौर पर वही आपत्तिजनक सामग्री दोहराई गई और पूनावाला के लिए “सामूहिक हत्यारा” जैसे शब्द का इस्तेमाल जारी रखने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने पाया कि उसका पहले का निषेधाज्ञा आदेश अभी भी प्रभावी है और अदालत के सामने ऐसा कोई सबूत नहीं रखा गया जिससे यह पता चले कि उक्त आदेश पर रोक लगाई गई है, उसमें बदलाव किया गया है या उसे रद्द कर दिया गया है। भविष्य की हर सामग्री स्वतः हटाने की मांग नहीं मानी X Corp को संबंधित नया वीडियो हटाने का निर्देश देते हुए हाई कोर्ट ने भविष्य में प्रकाशित होने वाली सामग्री को अपने-आप हटाने तथा प्रतिवादियों के सोशल मीडिया अकाउंट को सस्पेंड या डिलीट करने जैसी व्यापक मांगों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई इंटरमीडियरी “न्यायकर्ता या सेंसर की भूमिका नहीं निभा सकता।” इंटरमीडियरी को दिए जाने वाले निर्देश ऐसी पहचान योग्य सामग्री तक सीमित होने चाहिए, जिस पर अदालत ने विचार किया हो और जिसे आपत्तिजनक या गैर-कानूनी पाया गया हो। अदालत ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 के आदेश के कथित उल्लंघन को लेकर टेंगरा के खिलाफ सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर XXXIX नियम 2A के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। यह प्रावधान अस्थायी निषेधाज्ञा या अंतरिम आदेश के उल्लंघन अथवा उसकी अवहेलना के परिणामों से संबंधित है।
