
वीडियो कॉल के जरिए फंसाकर दुष्कर्म व पॉक्सो की धमकी, करोड़ों की उगाही का आरोप
इंद्र यादव
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। गोरखपुर से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने पुलिस महकमे और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। अंशिका सिंह नामक महिला पर आरोप है कि उसने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के जरिए न सिर्फ आम नागरिकों, बल्कि पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी निशाना बनाया। जांच में अब तक 165 लोगों की पीड़ित सूची सामने आई है, जिनमें अयोध्या के एक सीओ सहित करीब 15 पुलिसकर्मी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला सोशल मीडिया और मैसेंजर ऐप्स के जरिए लोगों से संपर्क करती थी। बातचीत के बाद वह वीडियो कॉल पर बात करने के लिए राजी करती और कॉल के दौरान वीडियो रिकॉर्ड कर लेती थी। इसके बाद रिकॉर्डिंग के आधार पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूल किए जाते थे। डर और सामाजिक बदनामी के भय से कई लोग समझौते के नाम पर मोटी रकम देने को मजबूर हो गए। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपने प्रभाव और पहुंच का प्रदर्शन करने के लिए नेताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ तस्वीरें साझा कीं, जिससे पीड़ितों में भय का माहौल बना। आरोप है कि एक मामले में एक दारोगा से सोने की चेन तक ले ली गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगातार इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रही थी। मामले में एक मकान मालिक की शिकायत भी सामने आई है। आरोप है कि मकान में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने पर आरोपी ने उस पर भी मुकदमा दर्ज करा दिया और जेल जाने के बाद भी पैसे की मांग जारी रखी। फिलहाल अंशिका सिंह पुलिस हिरासत में है और उसका मोबाइल फोन व डिजिटल डाटा जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला न सिर्फ कानून के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर पेश करता है, बल्कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते खतरे और सतर्कता की जरूरत को भी रेखांकित करता है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क में सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।




