यूपी में रेस्तरां-कैफे के स्मोकिंग एरिया में भी नहीं चल सकेंगे हुक्का बार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

लखनऊ खंडपीठ ने 70 से अधिक कैफे-रेस्तरां की याचिकाएं कीं खारिज, कहा— हुक्का उपलब्ध कराना भी ‘सेवा’ के दायरे में


लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में हुक्का बार के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि रेस्तरां और कैफे में बनाए गए निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का बार का संचालन नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस संबंध में दाखिल 70 से अधिक कैफे और रेस्तरां की याचिकाओं को खारिज कर दिया। मामले में एम/एस अफटेक फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, फैशन टीवी कैफे, गोमतीनगर समेत अन्य प्रतिष्ठानों ने याचिकाएं दाखिल कर पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके पास खाद्य सुरक्षा विभाग का वैध लाइसेंस है और उन्होंने सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के प्रावधानों के तहत निर्धारित स्मोकिंग एरिया भी बनाया है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। फैसले के मुताबिक, 23 मई 2017 को COTPA के नियम 4(3) में किए गए संशोधन के बाद निर्धारित स्मोकिंग एरिया में किसी भी प्रकार की सेवा उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने स्मोकिंग एरिया में हुक्का उपलब्ध कराने को नियमों के अनुरूप नहीं माना। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि हुक्का स्मोकिंग एरिया के बाहर तैयार किया जाएगा और ग्राहक स्वयं उसे उठाकर निर्धारित स्मोकिंग एरिया में ले जाएगा। इसलिए इसे प्रतिष्ठान द्वारा दी गई ‘सेवा’ नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हुक्का पीने की व्यवस्था में मानवीय सहायता की आवश्यकता होती है, इसलिए इसे सेवा की श्रेणी से बाहर नहीं माना जा सकता। केवल हुक्का बाहर तैयार कर ग्राहक द्वारा उसे स्मोकिंग एरिया तक ले जाने से कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार चलाने के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। इसलिए सामान्य खाद्य लाइसेंस या अन्य स्थानीय अनुमति को हुक्का बार संचालन की अनुमति नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को सूचना एवं आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है। फैसले में COTPA की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने के अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है।इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में रेस्तरां और कैफे संचालक केवल निर्धारित स्मोकिंग एरिया होने के आधार पर वहां हुक्का सेवा उपलब्ध कराने का दावा नहीं कर सकेंगे।

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