महाराष्ट्र FDA का बड़ा फैसला: अस्पतालों, डॉक्टरों और सोशल मीडिया पर शिशु फॉर्मूला मिल्क के प्रचार पर लगी रोक
फॉर्मूला मिल्क पर भ्रामक प्रचार, डॉक्टरों को उपहार-प्रायोजन और सोशल मीडिया प्रमोशन पर रोक, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

हादी अली शेख
मुंबई। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने शिशुओं के पोषण से जुड़े खाद्य पदार्थों के उत्पादन, बिक्री, लेबलिंग और प्रचार-प्रसार को लेकर कड़ा एवं व्यापक आदेश जारी किया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा जारी आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे महाराष्ट्र में लागू किया गया है। इसके दायरे में शिशु फॉर्मूला, इन्फैंट मिल्क फूड, फॉलो-अप फॉर्मूला, पूरक आहार, विशेष चिकित्सीय आहार और फीडिंग बोतलों का कारोबार करने वाले निर्माता, आयातक, मेडिकल स्टोर, अस्पताल तथा ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। FDA ने स्पष्ट किया है कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चे अत्यंत संवेदनशील उपभोक्ता हैं और वे अपने आहार का चयन स्वयं नहीं कर सकते। मंगलवार को आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि हालिया जांच में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें बेबी सीरियल, हेल्थ मिक्स या न्यूट्रिशन पाउडर जैसे नामों के जरिए नियमों को दरकिनार कर उत्पाद बेचे जा रहे थे। इसके अलावा निजी संस्थाओं द्वारा मानवी दूध (ह्यूमन मिल्क) का संग्रह कर ऑनलाइन बिक्री तथा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से फॉर्मूला मिल्क के कथित भ्रामक प्रचार के मामले भी सामने आए थे। इन्हीं गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए FDA ने यह कदम उठाया है। नए आदेश के तहत खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (IMS) Act, 1992 के प्रावधानों के अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को उल्लंघन के मामलों में जांच, तलाशी, जब्ती और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिशु आहार की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर भी सख्ती बरतने को कहा गया है। पैकेट पर मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम होने संबंधी निर्धारित चेतावनी देना अनिवार्य होगा। उत्पाद के इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सलाह संबंधी निर्धारित जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी। शिशु अथवा महिला की तस्वीरों और उत्पाद को मां के दूध जैसा या संपूर्ण आहार बताने वाले ‘ह्यूमनाइज्ड’ तथा ‘कंप्लीट फूड’ जैसे भ्रामक शब्दों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। FDA ने अस्पतालों, डॉक्टरों और बाल रोग विशेषज्ञों से जुड़े प्रचार पर भी कड़े निर्देश दिए हैं। कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मेडिकल कॉन्फ्रेंस, सेमिनार अथवा शोध को प्रायोजित करने तथा डॉक्टरों को उपहार, यात्रा खर्च या वक्ता शुल्क जैसे लाभ देने पर प्रतिबंध रहेगा। डिजिटल माध्यमों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप के जरिए छूट, कूपन, कैशबैक अथवा इन्फ्लुएंसर प्रमोशन के माध्यम से शिशु आहार के प्रचार पर कार्रवाई की जाएगी। फॉर्मूला मिल्क या संबंधित उत्पाद के सेवन के बाद किसी शिशु में संक्रमण, एलर्जी अथवा अन्य प्रतिकूल प्रभाव सामने आने की स्थिति में अस्पतालों को इसकी सूचना FDA को देने के निर्देश दिए गए हैं। उत्पादकों के लिए ऐसे मामलों में 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था की गई है। नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन ने कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है। भ्रामक विज्ञापन और बिना लाइसेंस कारोबार के मामलों में ₹10 लाख तक जुर्माना, अमानक खाद्य पदार्थ के मामले में ₹5 लाख तक जुर्माना तथा असुरक्षित खाद्य पदार्थ के सेवन से मृत्यु होने की स्थिति में लागू कानून के तहत आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने नागरिकों से शिशुओं के लिए खाद्य उत्पाद खरीदते समय लाइसेंस, निर्धारित मानकों और आवश्यक मार्किंग की जांच करने की अपील की है। FDA ने शिकायत अथवा जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-222-365 पर संपर्क करने को कहा है।
