महाराष्ट्र की वित्तीय व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी, छह महीने में रोडमैप बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा— राजस्व बढ़ाने के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ें, कम ब्याज पर पड़े सरकारी संस्थाओं के हजारों करोड़ के बेहतर उपयोग पर जोर


मुंबई। महाराष्ट्र में निधि जुटाने, लेखांकन और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी आवंटन की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र शाश्वत सार्वजनिक वित्त समिति को इन तीनों मोर्चों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करते हुए राज्य की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए अगले छह महीने में जरूरी सुधारों का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सोमवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित महाराष्ट्र शाश्वत सार्वजनिक वित्त समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के कर और गैर-कर राजस्व को बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक राजस्व संग्रह पद्धतियों पर निर्भर रहने के बजाय संसाधन जुटाने के नए रास्ते तलाशने होंगे। मुख्यमंत्री ने वित्तीय प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण विसंगति की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि राज्य की विभिन्न संस्थाओं के पास करीब ₹6 हजार से ₹7 हजार करोड़ की राशि लगभग 4 प्रतिशत ब्याज दर पर निवेशित है, जबकि दूसरी ओर राज्य सरकार को बाजार से 8 से 9 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ता है। इस अंतर को दूर कर उपलब्ध धन का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए उचित व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि संबंधित संस्थाओं की वित्तीय स्वायत्तता बरकरार रखते हुए उनके धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले नए और अभिनव वित्तीय साधन विकसित किए जाने चाहिए। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और सरकार पर महंगे कर्ज का दबाव कम करने की दिशा में काम किया जा सकेगा। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए खर्च प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, निधि नियोजन में कमियों के कारण कई बार सरकारी निवेश से अर्थव्यवस्था पर अपेक्षित गुणक प्रभाव हासिल नहीं हो पाता। इसलिए केवल पैसा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही समय पर और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञ समिति का गठन केवल औपचारिकता के लिए नहीं किया गया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार की मौजूदा कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रणालियों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। राज्य के वित्तीय संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग और योजनाओं पर होने वाले खर्च से बेहतर परिणाम हासिल करना इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य रहेगा। बैठक में वित्त राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, समिति के अध्यक्ष विजय केलकर, सदस्य कार्तिक मुरलीधरन और रवि शंकर, पूर्व मुख्य सचिव डॉ. नितिन करीर, राजस्व एवं वन विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, ऊर्जा विभाग की प्रधान सचिव आभा शुक्ला, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी और वित्त विभाग के प्रधान सचिव विजय वाघमारे उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *