
मुंबई। राज्य के ग्राम, तालुका और जिला स्तर पर विकासोन्मुख कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य में ‘जिला कर्मयोगी कार्यक्रम 2.0’ तथा सरपंचों की क्षमता बढ़ाने के लिए ‘सरपंच संवाद कार्यक्रम’ लागू करने का निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। बुधवार को बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। दोनों कार्यक्रम मित्रा संस्था के माध्यम से लागू किए जाएंगे। जिला कर्मयोगी 2.0 कार्यक्रम को ग्राम, तालुका और जिला स्तर पर लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रत्यक्ष सेवा प्रदान करने वाले अधिकारियों से लेकर स्थानीय प्रशासन के अंतिम स्तर तक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कौशल का विकास किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से जिले के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग इकाइयों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) सहित कृषि से जुड़े आर्थिक घटकों की समस्याओं के समाधान पर विशेष जोर दिया जाएगा। जिला स्तर पर शासन-से-व्यवसाय सेवाओं में सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाकर डेटा संकलन, आपसी सहयोग और निर्णय प्रक्रिया में सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अंतर्गत कृषि अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता और कार्यकारी अभियंता, ग्रामसेवक, तलाठी, कृषि सहायक, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी, सिंचाई नहर निरीक्षक, जिला एवं सहायक सांख्यिकी अधिकारी तथा सांख्यिकी निरीक्षक एवं अन्वेषक जैसे अधिकारियों को सशक्त बनाया जाएगा। राज्य में लगभग 85 हजार अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
सरपंच संवाद कार्यक्रम के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई), मित्रा और वीएसटीएफ फाउंडेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया है। इसके तहत राज्य के लगभग 20 हजार सरपंचों को प्रशिक्षण दिए जाने की योजना है। इस प्रशिक्षण में आर्थिक स्वायत्तता और संसाधन प्रबंधन, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने हेतु दीर्घकालिक योजना, महिला सदस्यों का सशक्तिकरण, क्रियान्वयन में आने वाली कमियों की पहचान और समाधान, तथा विभिन्न वर्गों के लिए समावेशी और समन्वित प्रशिक्षण शामिल रहेगा। यह प्रशिक्षण विशेषज्ञों के माध्यम से तथा ई-लर्निंग, वेबिनार, इन-ऐप प्रशिक्षण, वर्चुअल सत्रों और कार्यशालाओं के जरिए दिया जाएगा।




