
इन्द्र यादव/ मुंबई। मुंबई–कोल्हापुर हाईवे पर हुई करोड़ों रुपये की डकैती की वारदात महज एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि रात के सफर में आम नागरिक के मन में मौजूद सुरक्षा के भरोसे पर सीधा हमला है। 22 दिसंबर की रात कोल्हापुर से मुंबई की ओर जा रही एक निजी बस उस समय दहशत का केंद्र बन गई, जब सात हथियारबंद बदमाशों ने सुनियोजित तरीके से बस को निशाना बनाते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक के गहने और कीमती सामान लूट लिया। बदमाशों ने पहले घंटों तक बस का पीछा किया और फिर मौके का फायदा उठाकर चालक के साथ मारपीट की, वहीं बस के क्लीनर की गर्दन पर खंजर रखकर यात्रियों और कर्मचारियों को आतंकित किया। यह खंजर केवल एक व्यक्ति की जान के लिए खतरा नहीं था, बल्कि सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया। पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अक्षय कदम और उसके छह साथियों ने पूरी वारदात को बेहद योजनाबद्ध ढंग से अंजाम दिया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अब हाईवे पर चलने वाली व्यापारिक संपत्तियां भी अपराधियों के निशाने पर हैं। हालांकि इस घटना के बाद कोल्हापुर और वडगांव पुलिस की तत्परता राहत देने वाली रही। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महज 12 घंटे के भीतर सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और करीब 1.22 करोड़ रुपये मूल्य के लूटे गए गहने व अन्य सामान भी बरामद कर लिया। पुलिस की इस तेज कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून से बच नहीं सकते। बावजूद इसके, यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ जाती है—क्या निजी बसों में रात के समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं, लुटेरों को बस में मौजूद कीमती पार्सल की सटीक जानकारी कैसे मिली और क्या इसमें किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका है, साथ ही मुंबई–कोल्हापुर जैसे व्यस्त हाईवे पर पेट्रोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। यह डकैती न केवल एक अपराध है, बल्कि व्यवस्था के लिए एक चेतावनी भी है कि सड़क पर सफर करने वाले हर नागरिक की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना अब अनिवार्य हो चुका है।




