₹11.42 करोड़ के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में CBI का बड़ा एक्शन, दो और आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई तेज करते हुए 10 राज्यों में 22 ठिकानों पर छापेमारी की है। गुजरात से जुड़े ₹11.42 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की 27 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीड़ित को साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अधिकारी बनकर करीब तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान पीड़ित पर दबाव बनाकर सिंडिकेट के नियंत्रण वाले खातों में ₹11.42 करोड़ ट्रांसफर कराए गए।
सीबीआई ने वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर रकम के लेन-देन की कड़ियां खंगालते हुए छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बैंकिंग दस्तावेज, खातों से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई। एजेंसी इनकी फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि विभिन्न राज्यों में सक्रिय डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट के व्यापक वित्तीय और तकनीकी नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जांच के दौरान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास की कथित भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। सीबीआई के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर M/s Hexaquest Global Pvt. Ltd. के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए ₹11.42 करोड़ में से ₹2.5 करोड़ प्राप्त करने के लिए किया। इसके बाद रकम को कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी कथित तौर पर बैंक खातों के इस्तेमाल और APK फाइलें इंस्टॉल कर डिजिटल अरेस्ट तथा अन्य साइबर अपराधों से प्राप्त रकम निकालने में शामिल थे। उनके पास से जब्त डिजिटल उपकरणों में कई आपत्तिजनक चैट, संदेश और दस्तावेज मिलने की बात सीबीआई ने कही है। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
सीबीआई के अनुसार, पिछले 30 दिनों में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े चार मामलों में 22 राज्यों के 142 ठिकानों पर छापेमारी की गई और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने नागरिकों को एक बार फिर आगाह किया है कि पुलिस, CBI या कोई भी सरकारी एजेंसी किसी व्यक्ति को फोन अथवा वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही इस तरह पैसे की मांग करती है। ऐसी कॉल आने पर तुरंत संपर्क तोड़कर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने की सलाह दी गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।
