प्लास्टिक का मजबूत विकल्प बन सकता है बांस, आधुनिक तकनीक और व्यावसायीकरण पर देना होगा जोर: राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

मुंबई में ‘बांस अर्थव्यवस्था और सततता सम्मेलन 2026’ आयोजित, 13 राज्यों के किसान, उद्यमी और प्रतिनिधि हुए शामिल

मुंबई। बांस के उपयोग को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित न रखते हुए आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और व्यावसायीकरण के माध्यम से इसका विस्तार करने की आवश्यकता है। प्लास्टिक के विकल्प, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण में बांस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए बांस के उत्पादन के साथ उससे विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। यह बात राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने रविवार को मुंबई में कही। रविवार को मुंबई के होटल द वेस्टिन, पवई में ‘बांस अर्थव्यवस्था और सततता सम्मेलन 2026’ का आयोजन किया गया। विश्व बांस दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन राज्यपाल ने बांस के पौधे को पानी देकर और दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में 13 राज्यों के बांस उत्पादक किसान, उद्यमी और प्रतिनिधि शामिल हुए। दिनभर चले विभिन्न सत्रों में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, रोजगार सृजन और बांस उद्योग में मौजूद आर्थिक अवसरों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
राज्यपाल ने कहा कि बांस भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन से जुड़ा प्राकृतिक संसाधन है। बांस से आभूषण, कप, सजावटी वस्तुओं के साथ घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं बनाई जा रही हैं। अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और व्यावसायीकरण के जरिए बांस को सस्ता, टिकाऊ और आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध विकल्प बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के साथ बांस की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने वाला सतत विकास सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बांस की खेती किसानों के लिए बन सकती है अतिरिक्त आय का जरिया: भरत गोगावले
रोजगार गारंटी योजना, बागवानी एवं खारभूमि मंत्री भरत गोगावले ने कहा कि बांस की खेती को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसके लिए जनजागरूकता बढ़ाने के साथ बांस आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में बांस की खेती के लिए सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है और रोपण के बाद तीन वर्षों तक रखरखाव के लिए भी सहायता दी जाती है। बांस से विभिन्न वस्तुओं के निर्माण और उद्योग स्थापित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। खेती के साथ बांस की खेती किसानों के लिए उपयोगी सहायक व्यवसाय साबित हो सकती है।
बांस के जरिए हरित अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति: पाशा पटेल
महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री पर्यावरण एवं सतत विकास कार्यबल के कार्यकारी अध्यक्ष पाशा पटेल ने कहा कि महाराष्ट्र में बांस की खेती का विस्तार कर हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ रोजगार और आर्थिक विकास को भी गति दी जा सकती है। वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच बांस महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में 300 करोड़ वृक्षारोपण अभियान में भी बांस की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। सम्मेलन में गुजरात के जल संसाधन एवं जलापूर्ति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ईश्वरसिंह पटेल, केपी ग्रुप सूरत के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. फारुक पटेल, स्वामी डॉ. सत्य प्रकाश सरस्वती, ज्ञानचरित दास स्वामीजी, मौलाना जुझैफा वस्तानवी, टेफ्लाज के निदेशक आदिल सिंह सहित बांस उद्योग से जुड़े गणमान्य व्यक्ति, किसान और उद्यमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में आदिल सिंह ने आभार व्यक्त किया।

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