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ट्रांसजेंडर्स को शिक्षा-नौकरियों में रिजर्वेशन पर बॉम्बे HC का निर्देश, कहा- 3 महीने में रिपोर्ट दे सरकार

सरकारी नौकरियों और शिक्षा में ट्रांसजेंडर्स को आरक्षण देने की संभावनाओं को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया है. इस मामले में सरकार की योजना और विचार क्या है, इस पर रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन महीने का समय दिया है. मुंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को यह आदेश इस संबंध में विचार कर रही 15 सदस्यीय समिति को दिया. कोर्ट को एडवोकेट जनरल बिरेंद्र सराफ ने यह जानकारी दी थी कि इस मामले में राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने समिति स्थापित की है.

इस पर मुख्य न्यायमूर्ति संजय गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति संदीप मारणे की खंडपीठ ने समिति को यह निर्देश दिया. दरअसल पिछले साल के मई महीने में महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन लिमिटेड (महाट्रान्सको) की नौकरियों में नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. इन नौकरियों में ट्रांसजेंडर्स को आरक्षण का लाभ दिया जाए, इसलिए इससे संबंधित विज्ञापन में बदलाव लाया जाए, यह मांग करते हुए वकील क्रांति एल.सी. के जरिए बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. कंपनी की ओर से कोर्ट को यह कहा गया है कि जो भी महाराष्ट् सरकार की भूमिका होगी, उसके आधार पर कंपनी अपने फैसले लेगी.

रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन महीने का वक्त देने की मांग कोर्ट ने की स्वीकार
पिछली सुनवाई के दौरान इससे पहले दिए गए आदेश पर राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की? खंडपीठ के इस सवाल पर एडवोकेट जनरल बिंद्रा ने समिति के गठन की जानकारी दी और रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन महीने का समय मांगा. कोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली.

जैसा प्रावधान कर्नाटक में है, वैसा ही महाराष्ट्र में क्यों नहीं?
याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस तरह से कर्नाटक में सभी जाति और वर्ग के लिए 1 प्रतिशत का आरक्षण देे का प्रावधान है, वैसा ही महाराष्ट्र में क्यों नहीं किया जा सकता है. रोजगार और शिक्षा में ट्रांसजेंडर्स की भर्ती के लिए राज्य सरकार की ओर से 3 मार्च 2023 को प्रस्ताव (गवर्नमेंट रिजोल्यूशन) मंजूर किया गया था. जिसके तहत समिति गठित की गई थी. समिति की पहली मीटिंग 28 मार्च 2023 को होने वाली है. इस बैठक में ट्रांसजेंडर्स को आरक्षण देने संबंधी आगे के लिए राह तय की जानी है. देखना है कि ट्रांसजेंडर्स को आरक्षण देने से संबंधित मामले में अगले तीन महीने में यह समिति क्या रिपोर्ट सामने लाती है.

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