गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड की सुरंग का 64 मीटर काम पूरा, दूसरी मशीन से 22 अक्टूबर को शुरू होगी खुदाई

मुंबई। गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर) परियोजना के तीसरे चरण के तहत संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे जुड़वां सुरंगों का निर्माण चल रहा है। बीएमसी के अनुसार, पहली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ‘तुलसी’ ने अब तक 64 मीटर खुदाई पूरी कर ली है। दूसरी मशीन ‘विहार’ के पुर्जे जोड़ने का काम 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बीएमसी ने तकनीकी परीक्षण सफल होने पर ‘विहार’ से 22 अक्टूबर 2026 को दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू करने की योजना बनाई है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्य की समीक्षा की। उन्होंने सुरंग खोदने की प्रक्रिया, अब तक हुई प्रगति, मशीनों की कार्यक्षमता, निर्माण की गुणवत्ता और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। निर्धारित समय में परियोजना पूरी करने के लिए आवश्यक योजना और उपायों पर भी अधिकारियों से चर्चा की। बीएमसी के मुताबिक, ‘तुलसी’ मशीन 17 अगस्त 2026 से काम कर रही है। 64 मीटर खुदाई के दौरान मशीन की मदद से सुरंग के भीतर 27 स्थायी छल्लेदार संरचनाएं स्थापित की गई हैं। इसके अलावा दो अस्थायी छल्लेदार संरचनाएं भी लगाई गई हैं। ये संरचनाएं खुदाई के साथ सुरंग को आकार और सहारा देने के काम आती हैं। परियोजना के तहत गोरेगांव पूर्व स्थित दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से मुलुंड की ओर भूमिगत जुड़वां सुरंगें बनाई जा रही हैं। प्रत्येक सुरंग में तीन लेन होंगी। बीएमसी की ओर से दी गई जानकारी में सुरंग मार्ग की लंबाई एक स्थान पर 5.30 किलोमीटर और समांतर सुरंगों की लंबाई दूसरे स्थान पर 4.70 किलोमीटर बताई गई है। इस अंतर का स्पष्टीकरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। समांतर सुरंगों का व्यास 14.20 मीटर और राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में 13 मीटर बताया गया है। ‘तुलसी’ एक सिंगल शील्ड अर्थ प्रेशर बैलेंस हार्ड रॉक टीबीएम है। इसके कटर का व्यास 14.49 मीटर और मशीन की कुल लंबाई 83 मीटर है। इसमें 22 मीटर का शील्ड भाग और 61 मीटर लंबी तीन मंजिला बैकअप गैन्ट्री शामिल है। खुदाई से निकलने वाले मलबे को हटाने के लिए मशीन में स्वचालित प्रणाली लगाई गई है, जिसमें 340 मीटर लंबा कन्वेयर और अन्य कन्वेयर उपकरण शामिल हैं। दूसरी मशीन ‘विहार’ को परियोजना स्थल पर जोड़ने का काम अंतिम चरण में है। बीएमसी के अनुसार, मशीन स्थापित होने के बाद उसकी कार्यक्षमता, सुरक्षा और विभिन्न प्रणालियों के एक साथ काम करने की जांच के लिए 13 अक्टूबर 2026 से साइट स्वीकृति परीक्षण शुरू किया जाएगा। सभी तकनीकी जांच निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी होने पर 22 अक्टूबर 2026 से दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू करने की योजना है। समीक्षा बैठक में बांगर ने सुरंग निर्माण की निगरानी के लिए एक डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें परियोजना की मौजूदा स्थिति, काम पूरा होने का प्रतिशत, रोजाना की खुदाई, अपेक्षित प्रगति, सुरक्षा संबंधी जानकारी और समयसीमा दिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे अधिकारियों और इंजीनियरों को काम की प्रगति की जानकारी एक जगह उपलब्ध होगी। बांगर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खुदाई में देरी रोकने के लिए मशीनों, तकनीकी जरूरतों और मानव संसाधन की नियमित समीक्षा की जाए। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने सुरंग निर्माण के हर चरण में सुरक्षा मानकों का पालन करने, आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध रखने और संभावित जोखिमों से बचाव के उपाय लागू करने पर जोर दिया। बीएमसी ने इस परियोजना को फरवरी 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। निरीक्षण के दौरान प्रमुख अभियंता (पुल) राजेश मुले, उपप्रमुख अभियंता (पुल) नरेश मेघराजानी तथा अन्य अधिकारी और इंजीनियर उपस्थित थे।
