महाराष्ट्र में सड़क हादसों पर लगाम के लिए बड़ा प्लान, हर 50 किमी पर ट्रॉमा केयर सुविधा की तैयारी
108 और निजी एंबुलेंस को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रस्ताव; सड़क सुरक्षा के लिए PWD फंड का 10% आरक्षित करने का सुझाव, 11 जिलों में ‘जीरो फैटेलिटी’ अभियान

मुंबई। महाराष्ट्र में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए परिवहन, पुलिस, सार्वजनिक निर्माण, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को परिवहन मंत्री एवं राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने मंत्रालय में आयोजित 13वीं राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में सड़क सुरक्षा ऑडिट के साथ दुर्घटना पीड़ितों को ‘गोल्डन ऑवर’ में तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। सरनाईक ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘पीएम-राहत’ योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत प्रति व्यक्ति ₹1.50 लाख तक अधिकतम सात दिनों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध है। मंत्री ने कहा कि दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने के बाद इलाज शुरू करने में देरी नहीं होनी चाहिए। पुलिस पंजीकरण, डिजिटल पहचान संख्या और उपचार की मंजूरी निर्धारित समय में पूरी हो, इसके लिए स्वास्थ्य, पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर एकीकृत कार्यप्रणाली विकसित करें। दुर्घटना स्थल पर सबसे नजदीकी उपलब्ध एंबुलेंस जल्द पहुंच सके, इसके लिए 108 आपातकालीन सेवा और निजी एंबुलेंस को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। एंबुलेंस में कैमरा और दूरसंचार सुविधा उपलब्ध कराने पर भी विचार करने को कहा गया, ताकि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर रास्ते में ही घायल की स्थिति देख सकें और एंबुलेंस कर्मियों को जरूरी उपचार संबंधी मार्गदर्शन दे सकें। राज्य के ट्रॉमा केयर सेंटरों में उपलब्ध मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थिति की समीक्षा कर प्रत्येक 50 किलोमीटर के दायरे में सक्षम ट्रॉमा केयर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में योजना बनाने के निर्देश दिए गए। समृद्धि महामार्ग, एक्सप्रेस-वे, कोस्टल रोड और दुर्गम क्षेत्रों के लिए एयर एंबुलेंस सेवा की नीति तैयार करने का सुझाव भी बैठक में दिया गया। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क की योजना, निर्माण और रखरखाव के प्रत्येक चरण में नियमित ‘रोड सेफ्टी ऑडिट’ करने पर जोर दिया गया। सरनाईक ने कहा कि सड़क के बुनियादी ढांचे में इंजीनियरिंग संबंधी खामियों को दूर कर दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सकता है। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के फंड का 10 प्रतिशत सड़क सुरक्षा के लिए आरक्षित रखने का सुझाव दिया गया। दुर्घटना किस समय और स्थान पर हुई, वाहन की रफ्तार कितनी थी, सड़क की बनावट, प्रकाश व्यवस्था, पैदल यातायात और चालक की स्थिति जैसे पहलुओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए। राजमार्गों के आसपास अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण हटाने के साथ हाईवे पेट्रोलिंग टीमों को अधिक सक्षम बनाने पर भी जोर दिया गया। ओवरलोड वाहनों की पहचान के लिए इलेक्ट्रॉनिक ‘वे-इन-मोशन’ सेंसर का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ चलते वाहनों के प्रदूषण की जांच के लिए ‘पॉल्यूशन चेक-इन-मोशन’ यानी रिमोट सेंसिंग तकनीक के इस्तेमाल और PUC प्रमाणपत्र को वाहन तथा चालान प्रणाली से हाइब्रिड सॉफ्टवेयर के माध्यम से जोड़ने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और सेव लाइफ फाउंडेशन के सहयोग से चलाए जा रहे अभियान के तहत देश के 100 क्रिटिकल जिलों में महाराष्ट्र के 11 जिले शामिल हैं। नासिक ग्रामीण, पुणे ग्रामीण, अहिल्यानगर, सोलापुर ग्रामीण, जलगांव, सातारा, छत्रपति संभाजीनगर ग्रामीण, बीड, नागपुर ग्रामीण, कोल्हापुर और धुले में ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ पहल के तहत डेटा आधारित विश्लेषण कर सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि राज्य में वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 के दुर्घटना मृत्यु आंकड़ों में दोपहिया वाहन चालकों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और पैदल यात्रियों की 22 प्रतिशत रही। इसे देखते हुए इन दोनों वर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष उपायों को और प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा गया। बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले, परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय सेठ, परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर सहित सार्वजनिक निर्माण, स्वास्थ्य, परिवहन, गृह, यातायात तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
