
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार द्वारा दी जाने वाली सेवाएँ पारदर्शी, गतिशील और तकनीक-सक्षम होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि प्रशासन को संस्थागत रूप देते हुए किए जा रहे नवीन और निरंतर परिवर्तनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। शुक्रवार को सह्याद्रि अतिथि गृह में आयोजित 150 दिवसीय ई-गवर्नेंस सुधार अभियान की अंतरिम प्रगति समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और जनता के बीच समन्वय स्थापित करने वाला तंत्र विकसित करना आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य सचिव राजेश कुमार, विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, जिलों के कलेक्टर, नगर आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक और एआई का उपयोग प्रशासन का कार्यभार कम करेगा और सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाएगा। उन्होंने वन विभाग को तीन महीनों में 33 प्रतिशत वन क्षेत्र लक्ष्य हेतु चार वर्षीय योजना प्रस्तुत करने का सुझाव दिया तथा कम वन क्षेत्र वाले इलाकों और मराठवाड़ा में वनवृद्धि के प्रयासों पर बल दिया। बैठक के दौरान ‘समुद्र संदेश’ ऐप का उद्घाटन किया गया और सीमावर्ती क्षेत्रों में सीसीटीवी लगाने का सुझाव भी दिया गया। मुख्य सचिव राजेश कुमार ने बताया कि 150 दिवसीय कार्यक्रम में सभी कार्यालयों ने भाग लिया और नई तकनीकों का उपयोग करते हुए उत्कृष्ट कार्य किया। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक विभाग के अलग डैशबोर्ड के बजाय राज्य के लिए एकीकृत डैशबोर्ड होना चाहिए, और सभी प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इस कार्यक्रम के अंतर्गत ई-गवर्नेंस सुविधाएँ, आपले सरकार, ई-ऑफिस, डैशबोर्ड, वेबसाइट अद्यतन, आपदा प्रबंधन सहित कई क्षेत्रों का मूल्यांकन किया गया। प्राप्त अंकों के आधार पर विभिन्न श्रेणियों से चुने गए अधिकारियों ने प्रस्तुति दी, जिनमें नागपुर जिला परिषद के सीईओ विनायक महामुनि, जलगांव के जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद, पुणे नगर आयुक्त नवलकिशोर राम, सोलापुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक मनोज पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।