तनाव और तेज रफ्तार जिंदगी में संतुलन का प्रभावी माध्यम है योग: उपराष्ट्रपति

कैवल्यधाम के गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज के अमृत महोत्सव में बोले सी.पी. राधाकृष्णन- सूचना की अधिकता के दौर में मन और शरीर को जोड़ता है योग

पुणे। उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन ने कहा कि तकनीक और तेज रफ्तार जीवनशैली के कारण बढ़ते तनाव के बीच योग व्यक्ति को संतुलन, जागरूकता और एकाग्रता प्रदान करता है। योग मन और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम है। उपराष्ट्रपति शुक्रवार को लोनावला स्थित कैवल्यधाम के गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ योग एंड कल्चरल सिंथेसिस के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने योग शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक समन्वय के क्षेत्र में 75 वर्ष पूरे करने पर संस्थान को बधाई दी। समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कैवल्यधाम ग्लोबल के अध्यक्ष सुरेश प्रभु, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुबोध तिवारी और राकेश सेकसरिया सहित शिक्षक, विद्यार्थी और पूर्व छात्र उपस्थित रहे। राधाकृष्णन ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में योग व्यक्ति को रुकने, चिंतन करने, सांस पर ध्यान केंद्रित करने और स्वयं से दोबारा जुड़ने का अवसर देता है। लगातार नोटिफिकेशन और सूचनाओं की अधिकता के दौर में मन को शांत एवं एकाग्र रखने की आवश्यकता और बढ़ गई है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उपराष्ट्रपति ने कैवल्यधाम के संस्थापक स्वामी कुवलयानंद के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस समय योग के वैज्ञानिक अध्ययन की शुरुआत की, जब इसे मुख्य रूप से आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में देखा जाता था। उन्होंने कहा कि अच्छी विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है और योग केवल एक पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली प्रत्येक पीढ़ी के लिए है।उन्होंने युवाओं से योग के माध्यम से अनुशासन, एकाग्रता और आत्म-जागरूकता विकसित करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार ऊर्जा, प्रतिभा और महत्वाकांक्षा है और इसे अनुशासन एवं जागरूकता से जोड़कर उनकी क्षमता को और प्रभावी बनाया जा सकता है। समारोह में उन्होंने ओ.पी. तिवारी की पुस्तक ‘Yoga Explained – Learn From the Master’ का भी विमोचन किया। इस अवसर पर योग की दुनिया भर में बढ़ती स्वीकार्यता और उसके मूल ज्ञान तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। योग को शारीरिक तंदुरुस्ती, मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

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