
मीरा-भायंदर। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए मीरा-भायंदर महानगरपालिका (एमबीएमसी) ने ‘बप्पा मेरा शाडू का’ अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत गुरुवार को पालिका मुख्यालय में ‘बप्पा कट्टा’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव को बढ़ावा
महानगरपालिका कई वर्षों से पर्यावरण के अनुकूल गणेशोत्सव मनाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है। इस वर्ष, महापालिका के नवाचार विभाग द्वारा ‘बप्पा मेरा शाडू का’ अभियान शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के बजाय शाडू मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देना है। पर्यावरणविद रोहित जोशी ने कार्यक्रम में मार्गदर्शन करते हुए बताया कि पीओपी मूर्तियां जल प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों को कैसे नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने पीओपी मूर्तियों के विघटन में लगने वाले समय और पर्यावरण पर उनके नकारात्मक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में शहर के मूर्तिकारों और नागरिकों को शाडू मिट्टी अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। उपस्थित मूर्तिकारों ने अपने सवालों के जवाब पर्यावरण विशेषज्ञों से प्राप्त किए।
कार्यक्रम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में अतिरिक्त आयुक्त डॉ.संभाजी पानपट्टे, उपायुक्त कल्पिता पिंपले, सहायक आयुक्त योगेश गुणीजान, कंचन गायकवाड़, सुधाकर लेंडे, दत्तात्रेय वरकुटे, लॉरेटा घाडगे सहित पर्यावरण प्रेमी, मूर्तिकार और समाजसेवी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। ‘बप्पा मेरा शाडू का’ अभियान से मीरा-भायंदर में पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव मनाने की एक नई दिशा मिलेगी, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।




