
मुंबई। बदलापुर में दो नाबालिग लड़कियों के साथ स्कूल परिसर में हुए यौन उत्पीड़न मामले के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा गठित एक समिति ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई सिफारिशें की हैं। बुधवार को हाईकोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में दो पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की अध्यक्षता वाली समिति ने स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य करने, कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन, स्कूलों द्वारा सुरक्षित परिवहन की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने, बच्चों को ‘अच्छे स्पर्श’ और ‘बुरे स्पर्श’ के बारे में जागरूक करने, साइबर अपराधों से बचाव की शिक्षा देने और 1098 (बाल हेल्पलाइन) के प्रचार जैसे उपायों की सिफारिश की है। बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर इन सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की जानकारी दे। अदालत ने कहा, “हम रिपोर्ट पर भी गौर करेंगे। राज्य सरकार को इस पर जल्द निर्णय लेना होगा। गौरतलब है कि अगस्त 2023 में बदलापुर के एक स्कूल में दो पांच वर्षीय लड़कियों के साथ एक संविदा कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न किया था। आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सितंबर में पुलिस की कथित मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार को विशेषज्ञों की समिति गठित कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की कि स्कूलों में सीसीटीवी फुटेज कम से कम एक महीने तक संरक्षित की जाए और किसी कर्मचारी का आपराधिक इतिहास पाए जाने पर उसे तत्काल बर्खास्त किया जाए। इसके अलावा, पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को “अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श” का अंतर समझाने के लिए प्रदर्शन आधारित शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन सिफारिशों पर कितनी जल्दी अमल करती है।




