
मुंबई। राज्य के सभी मछुआरा संस्थाओं को निष्पक्ष रूप से तालाब आवंटित करने और तालाब के क्षेत्रफल का निर्धारण संस्थाओं के सदस्यों की संख्या के आधार पर करने की नीति बनाई जाए, ऐसे निर्देश मंगलवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने दिए। मंत्रालय में जलाशय मत्स्य व्यवसाय सहकारी संस्थाओं की समस्याओं को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मत्स्य व्यवसाय मंत्री नितेश राणे, मत्स्य व्यवसाय सचिव डॉ. एन. रामास्वामी, मत्स्य व्यवसाय आयुक्त किशोर तावड़े, मत्स्य उद्योग निगम की प्रबंध निदेशक अनीता मेश्राम, मछुआरा संस्थाओं के प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
तालाब आवंटन की होगी मानकीकृत प्रक्रिया
बैठक में मंत्री बावनकुळे ने कहा कि जिन संस्थाओं में 1 से 25 सदस्य हैं, उन्हें 50 हेक्टेयर तक के तालाब आवंटित किए जाएं, और जैसे-जैसे सदस्य संख्या बढ़े, तालाब का क्षेत्रफल भी बढ़ाया जाए। तालाब आवंटन की प्रक्रिया मानकीकृत हो और इसकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्रीय अधिकारियों को दी जाए। मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि मत्स्य उत्पादन में वृद्धि और उद्योग की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) नियुक्त किए जाएं। राज्य के छह राजस्व विभागों के लिए छह पीएमसी नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे मत्स्य उत्पादन को और गति मिलेगी।
मछुआरों के लिए प्रशिक्षण और डिजिटलाइजेशन की पहल
मछुआरा संस्थाओं को प्रशिक्षण देने, उच्च गुणवत्ता वाली मछली बीज उपलब्ध कराने और इसके लिए बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। राज्य के सभी तालाबों का नियंत्रण मत्स्य व्यवसाय विभाग के पास होना चाहिए और इसके लिए जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। इसके अलावा, जिला योजना निधि का कम से कम 10 प्रतिशत मत्स्य व्यवसाय के लिए आरक्षित करने और इस व्यवसाय के समग्र विकास के लिए व्यापक योजना तैयार करने की भी सिफारिश की गई।
“मछुआरों के हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता” – नितेश राणे
मत्स्य व्यवसाय मंत्री नितेश राणे ने कहा कि राज्य में मछुआरे पहले से ही सक्षम हैं, और उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि कुछ बाहरी और फर्जी लोग मत्स्य व्यवसाय में प्रवेश कर गए हैं, जिससे अनियमितताएँ बढ़ रही हैं। इस पर कड़ा नियंत्रण रखना आवश्यक है ताकि वास्तविक मछुआरों के हित सुरक्षित रह सकें। मंत्री राणे ने घोषणा की कि राज्य के सभी तालाबों और मत्स्य व्यवसाय विभाग का डिजिटलाइजेशन करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी मछुआरा संस्था के साथ अन्याय नहीं होगा।
“पूरे राज्य में समान नीति बने” – सचिव डॉ. रामास्वामी
मत्स्य व्यवसाय सचिव डॉ. एन.रामास्वामी ने कहा कि राज्य में एक समान नीति लागू होनी चाहिए ताकि मछुआरों को अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि मत्स्य व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त निधि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। बैठक में 2023 के सरकारी निर्णय पर लगी रोक हटाने से होने वाले लाभों पर एक डिजिटल प्रस्तुति भी दी गई, जिससे मछुआरों को नई योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी मिल सके। सरकार के इन नए निर्णयों से मछुआरा संस्थाओं को बड़े तालाबों के आवंटन में पात्रता मिलेगी, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में मछुआरा संस्थाओं को सहयोग करना चाहिए, ऐसा आग्रह मंत्री नितेश राणे ने किया।




