
नागपुर। महाराष्ट्र में लाडली बहना योजना के लाभार्थियों की गहन जांच शुरू हो गई है। प्रशासन ने पाया कि कई अमीर और अपात्र महिलाएं भी इस योजना का लाभ उठा रही हैं। नागपुर में ऐसी 1,228 महिलाओं की पहचान हुई है, जिनके पास चार पहिया वाहन हैं, फिर भी उन्होंने योजना का लाभ लिया। महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा किए गए सत्यापन में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। कुछ महिलाएं किसान योजना और संजय गांधी निराधार योजना का भी लाभ ले रही थीं, जो इस योजना के नियमों के खिलाफ है। प्रशासन अब ऐसे अपात्र लाभार्थियों को बाहर करने की प्रक्रिया में जुट गया है।
क्या है सरकार की शर्तें?
सरकार ने इस योजना के लिए कई मानक तय किए थे। नौकरीपेशा और पेंशनभोगी महिलाएं, आयकर भरने वाली महिलाएं, चार पहिया वाहन रखने वाली महिलाएं और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाली महिलाएं इस योजना के लिए पात्र नहीं थीं। लेकिन सत्यापन में सामने आया कि कई अमीर महिलाओं ने भी इस योजना का लाभ उठाया।
अपात्र महिलाएं लौटा रही हैं पैसे
महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अधिकारी नंदकिशोर पटिए ने बताया कि कई महिलाएं अब कार्यालय पहुंचकर राशि वापस करने की इच्छा जता रही हैं। कुछ का कहना है कि वे पैसे लौटा सकती हैं, जबकि कुछ महिलाएं कह रही हैं कि उन्होंने राशि खर्च कर दी है, इसलिए वे आगे से योजना का लाभ नहीं लेना चाहतीं। महाराष्ट्र के वित्त राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने अपात्र महिलाओं से खुद ही योजना से बाहर होने की अपील की है। उन्होंने कहा, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं लेना चाहिए था, वे खुद होकर इससे बाहर हो जाएं। इस योजना के असली लाभार्थी वे महिलाएं हैं, जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हैं। लाडली बहना योजना की समीक्षा जारी है, और सरकार अब इसे पारदर्शी बनाने के लिए और कड़े कदम उठा सकती है।




