टाइगर श्रॉफ पर 17 साल के लड़के ने चलाया हथियार: तीन आरोपी कोटा से गिरफ्तार

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी करने के मामले में तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद भी मुंबई की कानून-व्यवस्था को लेकर उठे सवाल खत्म नहीं हुए हैं। जिस जुहू इलाके में रविवार शाम गोलियां चलीं, वह पुलिस स्टेशन से महज 350 मीटर दूर बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर हथियारबंद हमलावर इतने संवेदनशील इलाके में वारदात को अंजाम देकर फरार कैसे हो गए? प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ जुहू के पुष्पा नर्सी पार्क के पास फुटबॉल खेलकर अपनी बीएमडब्ल्यू कार से लौट रहे थे। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार तीन हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चला दीं। अभिनेता इस हमले में सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस के हाथ में गोली लगने और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की सूचना है।
मुंबई से भागकर कोटा पहुंचे संदिग्ध, पुलिस ने दबोचा
बताया जा रहा है कि वारदात के बाद हमलावर मोटरसाइकिल छोड़कर अंधेरी पश्चिम रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से ट्रेन पकड़कर मुंबई से फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज और रेलवे पुलिस की मदद से उनकी गतिविधियों का पता लगाया गया। सोमवार दोपहर तक तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें हरियाणा के सोनीपत का 17 वर्षीय किशोर, बिहार के बेगूसराय निवासी 22 वर्षीय ऋतिक कुमार उर्फ रोशन और सोनीपत निवासी 18 वर्षीय रेहान शामिल बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार, ऋतिक मुंबई के अंधेरी पश्चिम इलाके में किराए पर रहकर रैपिडो राइडर के रूप में काम करता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तीनों मुंबई में किसके संपर्क में थे, हथियार कहां से मिले और वारदात को अंजाम देने के लिए किसने निर्देश दिए।
पहले रेकी, फिर 45 मिनट इंतजार कर फायरिंग करने का दावा
मामले में यह जानकारी भी सामने आई है कि हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ के रविवार को फुटबॉल खेलने आने-जाने की दिनचर्या की कथित तौर पर रेकी की थी। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने घटनास्थल के आसपास लगभग 45 मिनट तक इंतजार किया और अभिनेता के निकलने पर फायरिंग की। यदि जांच में इन जानकारियों की पुष्टि होती है, तो यह वारदात अचानक हुई गोलीबारी के बजाय पूर्व नियोजित हमले की ओर संकेत करेगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमलावरों को अभिनेता की गतिविधियों की जानकारी कैसे मिली और क्या उन्हें किसी स्थानीय व्यक्ति ने मदद पहुंचाई?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से धमकी, सलमान खान से जोड़ा मामला
गोलीबारी के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से कथित पोस्ट और ऑडियो संदेश वायरल होने की जानकारी सामने आई। अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। इन संदेशों में कथित तौर पर टाइगर श्रॉफ को अभिनेता सलमान खान के साथ काम नहीं करने की चेतावनी देने और फिल्म उद्योग से जुड़े अन्य लोगों को धमकाने की बात कही गई है। हालांकि, इन संदेशों की प्रामाणिकता, इन्हें जारी करने वालों की पहचान और गिरफ्तार संदिग्धों का किसी आपराधिक गिरोह से वास्तविक संबंध अभी जांच का विषय है। केवल सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने से किसी गैंग की भूमिका प्रमाणित नहीं हो जाती।
मुख्यमंत्री ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया
घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से आरोपियों और हमले के पीछे मौजूद साजिशकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिए जाने की जानकारी है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी टाइगर श्रॉफ से मुलाकात करने की बात सामने आई है। लेकिन इस मामले में केवल गोली चलाने वाले संदिग्धों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। यदि वारदात के पीछे कोई संगठित आपराधिक गिरोह है, तो उसे हथियार, पैसा, जानकारी और निर्देश उपलब्ध कराने वालों तक पहुंचना भी जरूरी है।
क्या मुंबई में फिर लौट रहा है अंडरवर्ल्ड का खौफ?
कभी अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों से परेशान रही मुंबई में फिल्मी हस्तियों को धमकियां मिलने और गोलीबारी की घटनाओं ने पुरानी चिंताओं को फिर जिंदा कर दिया है। सलमान खान के आवास के बाहर हुई गोलीबारी और अन्य फिल्मी हस्तियों को मिली धमकियों के बाद टाइगर श्रॉफ की कार पर हमले की खबर ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है। चिंता केवल बॉलीवुड सितारों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इस घटना में एक ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की सूचना बताती है कि सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली गोलीबारी का खामियाजा निर्दोष नागरिकों को भी भुगतना पड़ सकता है। मुंबई पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह स्पष्ट करना है कि हमले की साजिश किसने रची, हमलावरों को किसने मदद पहुंचाई और क्या वास्तव में इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था। तीन संदिग्धों के पकड़े जाने से जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है, लेकिन मुंबई की सड़कों पर सुरक्षा का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब गोली चलाने वालों के साथ उन्हें ऐसा करने के लिए भेजने वालों की भूमिका भी सामने आएगी।
