महाराष्ट्र में 1,440 नए चिकित्सा अधिकारियों की होगी नियुक्ति
674 विशेषज्ञ और 766 एमबीबीएस चिकित्सक होंगे शामिल, ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

मुंबई। महाराष्ट्र के आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण, दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों की भर्ती को प्राथमिकता दी है। महाराष्ट्र चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा समूह-अ (एस-20) संवर्ग के 1,440 चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्ति आदेश वितरित करने के लिए 4 नवंबर को विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। इनमें 674 विशेषज्ञ चिकित्सक और 766 एमबीबीएस चिकित्सक शामिल हैं। इन नियुक्तियों से राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ी संख्या में चिकित्सकीय कर्मचारी मिलेंगे। साथ ही सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने में भी सहायता मिलेगी। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सक्षम, गुणवत्तापूर्ण, भरोसेमंद और जनहितकारी बनाने के लिए सरकार ने रिक्त पदों को भरने पर जोर दिया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, ग्रामीण अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों और जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाना आवश्यक हो गया है। इस भर्ती से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। आपातकालीन परिस्थितियों में भी उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
674 विशेषज्ञ और 766 एमबीबीएस चिकित्सकों की नियुक्ति
राज्य में चिकित्सा अधिकारी संवर्ग के कुल 2,514 पदों में से 1,440 पदों पर भर्ती के लिए 27 फरवरी 2026 को विज्ञापन जारी किया गया था। इस भर्ती प्रक्रिया में 674 विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी और 766 एमबीबीएस चिकित्सा अधिकारी शामिल हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति से ग्रामीण अस्पतालों से लेकर जिला अस्पतालों तक विभिन्न विशेषज्ञ उपचार सेवाओं को मजबूती मिलेगी। वहीं, एमबीबीएस चिकित्सकों की नियुक्ति से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित चिकित्सा सेवाएं बेहतर होंगी।
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के मरीजों को मिलेगी राहत
इन नियुक्तियों का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण, दुर्गम, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों को मिलने की उम्मीद है। कई स्थानों पर चिकित्सकों के पद रिक्त होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए दूरदराज के शहरों में जाना पड़ता है। चिकित्सकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर ही जांच, बीमारी का पता लगाने और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। दुर्घटनाओं, प्रसव, सर्पदंश, संक्रामक बीमारियों और अन्य आपातकालीन स्थितियों में समय पर उपचार मिलना आसान होगा। इसके अलावा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों के निदान एवं उपचार को भी गति मिलेगी। चिकित्सा अधिकारियों के रिक्त पद भरने से वर्तमान में कार्यरत डॉक्टरों पर काम का अतिरिक्त बोझ कम होगा। अस्पतालों के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), भर्ती मरीजों के उपचार, आपातकालीन सेवाओं और चिकित्सा जांच व्यवस्था में भी सुधार होने की उम्मीद है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों की बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार की गुणवत्ता और नागरिकों का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
‘स्वस्थ नागरिक, सक्षम स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रत्येक व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा’ के उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में 1,440 चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्तियां महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा, “राज्य के गरीब, जरूरतमंद और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। 1,440 चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्तियों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक सक्षम होगी और ग्रामीण जनता को समय पर उपचार मिलने में सहायता मिलेगी। नवनियुक्त चिकित्सकों को सेवाभाव और मरीजों को केंद्र में रखकर कार्य करना चाहिए।”
