Friday, April 10, 2026
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समृद्ध विरासत के संरक्षण और सांस्कृतिक विकास में उत्तर प्रदेश बना अग्रणी मॉडल

देवेश प्रताप सिंह राठौर/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली विरासत, उत्कृष्ट इतिहास और प्रगतिशील सोच के कारण देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी विशेष पहचान रखता है। यह भूमि कला, साहित्य, संगीत और धर्म की महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है। प्रदेश का संस्कृति विभाग इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए लगातार कार्यरत है, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे जनमानस तक पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। “अपनी धरोहर, अपनी पहचान” (एडॉप्ट-ए-हेरिटेज) नीति के तहत अभिरुचि की अभिव्यक्ति (EOI) के माध्यम से अब तक चार स्मारकों के लिए पांच वर्षों के एमओयू किए जा चुके हैं, वहीं प्राचीन धरोहरों के व्यापक संरक्षण और अनुरक्षण का कार्य भी तेजी से जारी है।
लोक कलाकारों को मिला नया मंच, हजारों कार्यक्रमों का आयोजन
प्रदेश में लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले जहां मात्र 415 कार्यक्रम होते थे, वहीं वर्तमान में हर वर्ष हजारों कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। “उत्तर प्रदेश संस्कृति उत्सव” के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से कलाकारों की खोज कर उनका पंजीकरण किया गया है।संस्कृति विभाग की आर्टिस्ट डायरेक्टरी में अब तक 9532 कलाकार दल और लगभग 24,750 कलाकार पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे प्रदेश के लोक कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच मिल रहा है।
पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि, देश में प्रथम स्थान
धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों के कारण उत्तर प्रदेश देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण केंद्र बन गया है। वर्ष 2025 में 1.56 अरब से अधिक पर्यटकों ने प्रदेश का भ्रमण किया, जिससे उत्तर प्रदेश घरेलू पर्यटन में देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया।
धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं का विस्तार
प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या, वाराणसी (काशी), चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और राम मंदिर अयोध्या जैसी परियोजनाएं वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बनी हैं।अयोध्या दीपोत्सव के दौरान वर्ष 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया, वहीं काशी में देव-दीपावली के आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचे।
तीर्थ यात्राओं और श्रद्धालुओं के लिए विशेष योजनाएं
प्रदेश सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को 1 लाख रुपये तक का अनुदान देने की व्यवस्था की है। गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा सिंधु दर्शन यात्रा के लिए 20 हजार रुपये प्रति यात्री सहायता भी दी जा रही है। संतों, पुरोहितों और पुजारियों के लिए विशेष बोर्ड गठन की प्रक्रिया जारी है। साथ ही विभिन्न तीर्थ विकास परिषदों—अयोध्या, ब्रज, विंध्य, चित्रकूट और नैमिषारण्य—का गठन कर धार्मिक स्थलों के समग्र विकास को गति दी गई है।
पर्यटन अधोसंरचना और रोजगार पर फोकस
प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए वर्ष 2026-27 में एक लाख अतिरिक्त कमरे जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 50,000 नए होम-स्टे कमरों का लक्ष्य रखा गया है और ब्रांडेड ऑपरेटरों को होम-स्टे पट्टे पर लेने की अनुमति दी जा रही है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए महिला पर्यटक गाइडों का 10,000 रुपये का लाइसेंस शुल्क माफ किया गया है। ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत देशी-विदेशी पर्यटकों को भारतीय परिवारों के साथ रहने और भारतीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर दिया जा रहा है।
युवा पीढ़ी को जोड़ने की पहल
प्रदेश सरकार महापुरुषों और राष्ट्रनायकों को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए भी प्रयासरत है। राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल की स्थापना की गई है, जहां प्रमुख राष्ट्रनायकों की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। प्रदेश सरकार के इन व्यापक प्रयासों से उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक संरक्षण, पर्यटन विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।

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