Saturday, February 7, 2026
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संघर्ष सेवा समिति बनी सहारा, लक्ष्मी के विवाह में सम्मान और संवेदना के साथ भेंट किए गए उपहार

सेवा, सहयोग और सम्मान की मिसाल: डॉ० संदीप ने लक्ष्मी को भेंट किए उपहार

देवेश प्रताप सिंह राठौर
झाँसी, उत्तर प्रदेश। मानव सेवा और सामाजिक कर्तव्य की भावना से प्रेरित एक सराहनीय कार्य के अंतर्गत संघर्ष सेवा समिति द्वारा बिटिया लक्ष्मी रजक के विवाह अवसर पर सहयोग प्रदान किया गया। उत्तर प्रदेश झांसी आवास विकास स्थित आरोग्य सदन अस्पताल क्षेत्र की निवासी लक्ष्मी रजक के पिता स्वर्गीय दशरथ प्रसाद का पहले ही देहांत हो चुका है। ऐसे में माता ममता रजक, जो घरों में भोजन बनाने का कार्य कर परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, ने कठिन परिस्थितियों में भी बेटी के विवाह की जिम्मेदारी निभाई। बिटिया लक्ष्मी का विवाह 5 फरवरी को संपन्न हुआ। विवाह की तैयारियों में संघर्ष सेवा समिति ने सहयोग का हाथ बढ़ाया। समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी के माध्यम से समिति कार्यालय पर ही बिटिया को आवश्यक उपहार भेंट किए गए। इनमें ट्रॉली बैग, रसोई सामग्री का सेट तथा अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुयें शामिल रहीं। इसके साथ ही कलर्स ब्यूटी पार्लर के माध्यम से वधू को तैयार कराया गया, जिससे उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और प्रसन्नता की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
इस अवसर पर डॉ. संदीप सरावगी ने कहा कि बेटियाँ समाज की धरोहर होती हैं। किसी भी कारण से यदि किसी परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाए, तो समाज का दायित्व बनता है कि वह आगे आकर सहयोग करे। संघर्ष सेवा समिति का उद्देश्य यही है कि कोई भी बेटी अभाव के कारण अपने विवाह में स्वयं को अकेला न महसूस करे। बिटिया लक्ष्मी के विवाह में सहयोग कर हमें आत्मसंतोष की सुखद अनुभूति हुई है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि बेटी के विवाह में दिया गया सहयोग केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए समाज का आशीर्वाद होता है। इस अवसर पर संदीप नामदेव, अनुज प्रताप सिंह, राजू शर्मा, अक्षत गुर्वे, अनिल गुर्वे, सुशांत गेड़ा, सागर, अनिकेत, कुणाल, नीतू रजक, बसंत गुप्ता, राजू सेन, राकेश अहिरवार, अंजली विश्वकर्मा, हर्षित अरोड़ा, रिया वर्मा, नितिन वर्मा, सिद्धांत गुप्ता, मिंटू बाल्मीकि, महेंद्र रैकवार, आशा सेन, धर्मेंद्र खटीक, अशोक काका तथा मनोज सोनी उपस्थित रहे। संघर्ष सेवा समिति की यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह संदेश देती है कि जब समाज एकजुट होकर आगे आता है, तब किसी भी परिवार की बेटी का विवाह अभाव के कारण बोझ नहीं बनता, बल्कि सम्मान और आत्मगौरव के साथ संपन्न होता है।

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