
पुणे। मकर संक्रांति के बाद भी नायलॉन मांझे से जुड़े हादसों का सिलसिला पुणे में जारी है। स्वारगेट क्षेत्र से सामने आए एक और गंभीर मामले ने प्रतिबंधित पतंग के धागे से होने वाले जानलेवा खतरों को उजागर कर दिया है। बार-बार चेतावनी, जागरूकता अभियानों और पिछले हादसों के बावजूद नायलॉन मांझा व्यस्त सड़कों और फ्लाईओवर पर लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ताजा घटना में धनकवाड़ी के रहने वाले 30 वर्षीय संकेत बोथरा देशभक्त लेट केशवराव जेधे फ्लाईओवर से शाम करीब छह बजे मोटरसाइकिल से गुजर रहे थे। इसी दौरान अचानक नायलॉन मांझा उनके गले और दाहिने हाथ में लिपट गया। खुद को छुड़ाने की कोशिश में वह धागा पास से गुजर रहे एक तेज रफ्तार वाहन में भी फंस गया, जिससे मांझा और कस गया और कुछ ही सेकंड में उनके हाथ को गंभीर नुकसान पहुंचा। तेज और धारदार नायलॉन धागे से संकेत बोथरा के दाहिने अंगूठे में गहरा कट लग गया। उनके अंगूठे का आधे से अधिक हिस्सा कट गया और उंगलियों की नसों को भी गंभीर क्षति पहुंची। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हाथ को बचाने के लिए आपातकालीन सर्जरी की। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन चोटें गंभीर हैं और लंबे इलाज की आवश्यकता पड़ सकती है। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद पुणे में नायलॉन मांझा खुलेआम बेचा और इस्तेमाल किया जा रहा है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। कुछ दिन पहले भारती विद्यापीठ इलाके में भी इसी तरह की घटना में एक युवती गंभीर रूप से घायल हो चुकी है। सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत टेंबेकर ने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि पतंग उड़ाने जैसी मनोरंजक गतिविधि अब जानलेवा बनती जा रही है। नायलॉन या चीनी मांझा इंसानों के साथ-साथ जानवरों और पक्षियों के लिए भी बेहद खतरनाक है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद इसके अवैध इस्तेमाल पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर इस खतरनाक मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाएगा, ताकि आम नागरिकों की जान सुरक्षित रह सके।




