Wednesday, January 14, 2026
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नगर निगम चुनावों के दौरान शराब बिक्री पर रोक को बॉम्बे हाई कोर्ट की हरी झंडी, विक्रेताओं को अंतरिम राहत से इनकार

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नगर निगम चुनावों के मद्देनज़र मुंबई में शराब की बिक्री पर तीन दिन की रोक लगाने के राज्य सरकार के आदेश पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। यह रोक मुंबई कलेक्टर द्वारा 14 से 16 जनवरी तक देसी और विदेशी दोनों तरह की शराब की बिक्री पर लगाई गई है। 15 जनवरी को मतदान होना है, जबकि 16 जनवरी को मतगणना और नतीजों की घोषणा की जाएगी। जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ ने मंगलवार को एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव रिटेल लिकर वेंडर्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकारी आदेश पर रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर “विस्तृत जांच” की आवश्यकता है और अंतरिम स्तर पर इस पर फैसला नहीं लिया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई मार्च में तय की है। याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 की धारा 135-सी की प्रयोज्यता को नगर निगम चुनावों पर लागू किए जाने को चुनौती दी है। इस धारा के तहत चुनावों के आसपास शराब की बिक्री पर रोक लगाने का प्रावधान है। एसोसिएशन की मांग थी कि यदि प्रतिबंध लगाया भी जाए तो उसे केवल 15 जनवरी को मतदान के घंटों तक ही सीमित रखा जाए।
अंतरिम राहत से इनकार करते हुए बेंच ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब यह साफ तौर पर दिखे कि कानून मनमाना है और यह व्यावसायिक गतिविधियों तथा पेशा करने के मौलिक अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध लगाता है। कोर्ट ने माना कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों को अंतरिम चरण में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। महाराष्ट्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील प्रियंका चव्हाण ने कोर्ट को बताया कि यह प्रतिबंध नगर निगम चुनावों के कारण लगाया गया है और 16 जनवरी को मतगणना पूरी होने के तुरंत बाद हटा लिया जाएगा। कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि ऐसे वार्ड चुनावों में, जहां मतदाताओं की संख्या सीमित होती है और ईवीएम का इस्तेमाल होता है, वहां नतीजे दो से तीन घंटे में घोषित हो जाते हैं। इसलिए 16 जनवरी को पूरे दिन शराब बिक्री पर रोक रहने की संभावना नहीं है। वहीं, याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से वकील सुरेश सबराड और अमेय सावंत ने दलील दी कि लगभग ढाई दिन के इस लंबे प्रतिबंध से लाइसेंसधारी शराब विक्रेताओं को भारी वित्तीय नुकसान होगा। उन्होंने तर्क दिया कि 14 जनवरी को न तो प्रचार हो रहा है और न ही मतदान, ऐसे में उस दिन शराब बिक्री पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून में मतदान से एक दिन पहले, मतदान के दिन और मतगणना पूरी होने तक शराब की बिक्री पर रोक लगाने की शक्ति स्पष्ट रूप से दी गई है। इस कारण अंतरिम स्तर पर इस प्रतिबंध को हटाया नहीं जा सकता। कोर्ट ने एसोसिएशन को याचिका में संशोधन की अनुमति दी है, ताकि विशेष रूप से यह घोषणा मांगी जा सके कि आरपीए की धारा 135-सी नगर निगम चुनावों पर लागू नहीं होती।

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