
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। उन्नाव द्वारा आयोजित 35 दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत तैयार की गई नाट्य कृति दरोगा जी का मंचन सोमवार को दोपहर 1 बजे बेनहर इंटर कॉलेज सभागार, सिविल लाइन, उन्नाव में किया गया। इस सामाजिक नाटक के माध्यम से पुलिस व्यवस्था, सामाजिक कुरीतियों, पारिवारिक विवादों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया गया। नाटक की कहानी थाने के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां दरोगा सिंह साहब अपने सहयोगी दीवान जी और सिपाही के साथ विभिन्न सामाजिक मामलों का समाधान करते दिखाई देते हैं। घर से भागे बालिग बच्चों के मामले में दरोगा दोनों परिवारों को समझा-बुझाकर शादी के लिए राजी कराते हैं। एक अन्य प्रसंग में शौचालय के अभाव के कारण मायके गई बहु को वापस लाने के लिए दरोगा घर में शौचालय बनवाने की हिदायत देते हैं और सरकारी सहायता की जानकारी देते हैं। जमीन विवाद, घरेलू हिंसा और संतान न होने पर महिला को प्रताड़ित करने जैसे मुद्दों को भी नाटक में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। अंत में दोनों परिवार बेटी को गोद लेकर उसे शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लेते हैं। नाटक का समापन सिपाही के संवाद से होता है कि आज फिर एक घर टूटने से बच गया। नाटक में जब्बार अकरम, शफी अहमद खान, राघवेन्द्र सिंह, नफीस सिद्दीकी, मोहम्मद मोईन, दीपक अवस्थी, बलराम सिंह निर्बल, मोहम्मद रफीक, दिव्यांशी अवस्थी, मोहम्मद आमिर, अनुराग यादव, विनीत जायसवाल, भारती मिश्रा, महेंद्र शानू, जया उपाध्याय सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया। रूप-सज्जा अस्मिता उपाध्याय ने की, जबकि कॉस्ट्यूम और प्रॉपर्टी की जिम्मेदारी सविता उपाध्याय, धीरज सिंह, अभिषेक वर्मा, मोहम्मद आजम अकरम और उमेश अग्निहोत्री ने संभाली। ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था अनुपम तिवारी और मोहम्मद शकील खान द्वारा की गई। कार्यक्रम में मास्टर नसीर अहमद और रंगकर्मी मोहित बरुआ ने सभी कलाकारों को प्रमाण पत्र और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। मंच संचालन श्री जे.पी. वर्मा ने किया। कॉलेज के शिक्षक अजय शंकर अवस्थी, गीता सक्सेना, मनोज शुक्ला, रूही सईद, रश्मि त्रिपाठी, मोनू शुक्ला, निखिल पांडे, शारिक खान और रविंद्र मोहन लंगोरा सहित बड़ी संख्या में दर्शकों ने नाटक देखा और सामाजिक नाटक दरोगा जी के सफल मंचन की सराहना की।




