
मुंबई। महिलाओं पर अत्याचार, उत्पीड़न और घरेलू हिंसा की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मौजूदा कानूनों का अधिक प्रभावी और सख्ती से क्रियान्वयन आवश्यक है, ऐसा विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोरे ने कहा। घरेलू हिंसा प्रतिषेध अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारियों तथा पुलिस विभाग के भरोसा सेल के अधिकारियों की संयुक्त जिला व तालुका स्तर पर तथा शहरों में जोन स्तर पर समन्वय बैठकें आयोजित करने के स्पष्ट निर्देश उन्होंने दिए। सोमवार को विधानभवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में घरेलू हिंसा प्रतिषेध अधिनियम, 2005 को अधिक प्रभावी बनाने, शक्ति विधेयक के क्रियान्वयन के संदर्भ में आगे की दिशा तय करने तथा अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित सुधार याचिका पर विस्तृत चर्चा की गई। डॉ. नीलम गोरे ने कहा कि बीएनएस के अनुसार कार्यप्रणाली में नियम 35 ए से 35 आई का सख्ती से पालन पुलिस द्वारा किया जाए तो पीड़ितों को बड़ा राहत मिल सकती है। इसके लिए पुलिस विभाग को उपयुक्त मानक कार्यप्रणाली तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अगले एक माह के भीतर सभी संबंधित विभागों द्वारा इन विषयों पर फॉलोअप कर विस्तृत कार्ययोजना तय करने को भी कहा गया है। बैठक का विस्तृत प्रतिवेदन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को भेजा जाएगा, यह जानकारी भी डॉ. गोरे ने दी। बैठक में पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, अपर पुलिस अधीक्षक अश्वती दोरजे, पूर्व न्यायमूर्ति साधना जाधव, महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त नयना गुंडे, उपसचिव डॉ. जयंत सरोदे, विधि एवं न्याय विभाग के उपसचिव सागर बॉन्द्रे तथा गृह विभाग के अवर सचिव जयसेन इंगोले उपस्थित थे। डॉ. गोरे ने कहा कि महिलाओं के आत्मसम्मान, गरिमा और सुरक्षा के लिए राज्य की सभी एजेंसियों को आपसी समन्वय और संवेदनशीलता के साथ कार्य करना होगा। घरेलू हिंसा की घटनाओं में महिलाओं को पीड़ित बनने से रोकने के लिए रोकथाम की उपाययोजनाओं को और अधिक प्रभावी तथा सख्ती से लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए प्रशासनिक तंत्र को अधिक सजग और संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है। पुलिस विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार कर उसका जिला स्तर पर क्रियान्वयन करना चाहिए। जिला स्तरीय महिला दक्षता समितियों के कार्यों की नियमित समीक्षा कर उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। पीड़ित महिलाओं को शीघ्र संरक्षण आदेश दिलाना, भरण-पोषण की प्रक्रिया में होने वाले विलंब को रोकना तथा महिलाओं को कानूनी सलाह उपलब्ध कराने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ समन्वय बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। इसके साथ ही वरिष्ठ सेवा शिकायत प्राधिकरण के संबंध में अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय में सुधार याचिका दायर करने को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है और इस पर भी बैठक में चर्चा हुई। डॉ. नीलम गोरे ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार समाज की मानसिकता से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। केवल कानूनों को कठोर बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका क्रियान्वयन पारदर्शी, संवेदनशील और प्रभावी होना चाहिए। महिलाओं के सशक्तिकरण, न्याय प्राप्ति और सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा समन्वित प्रयास किए जाना समय की आवश्यकता है।




