Tuesday, January 13, 2026
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बीजेपी में शामिल होने के बाद संतोष धुरी ने राज ठाकरे की आलोचना की, कहा- एमएनएस ने उद्धव सेना के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पूर्व नगरसेवक संतोष धुरी ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए मंगलवार को भाजपा का दामन थाम लिया। मुंबई में भाजपा नेता अमित साटम की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होने के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में धुरी ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों पर तीखा हमला बोला। संतोष धुरी ने आरोप लगाया कि राज ठाकरे ने “हरे खून वाले लोगों” के साथ गठबंधन कर लिया है और इन्हीं लोगों ने पूरी तरह से मनसे पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे ने हमारी पार्टी दूसरों के हवाले कर दी है। धुरी के मुताबिक, मुंबई में मनसे को बीएमसी चुनाव 2026 के लिए सिर्फ 52 सीटें दी गई हैं और इनमें से भी महज 7–8 सीटों पर जीत की कोई गारंटी नहीं है। धुरी ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने मनसे को वे सीटें नहीं दीं, जिनकी पार्टी को अपेक्षा थी। इसके बजाय मनसे को ऐसी सीटें दी गईं, जहां या तो शिवसेना (यूबीटी) का कोई उम्मीदवार नहीं था या जहां मौजूदा नगरसेवकों की छवि पहले से ही खराब थी। उन्होंने कहा कि माहिम, दादर, वर्ली, सेवरी और भांडुप जैसे मराठी बहुल इलाकों में भी मनसे को सिर्फ एक-एक सीट दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीट-बंटवारे की बातचीत के दौरान यह तय हुआ था कि मनसे हर विधानसभा क्षेत्र में दो सीटें खाली करेगी, लेकिन बाद में पार्टी को दादर के वार्ड नंबर 190 और 192 से भी वंचित कर दिया गया। धुरी के अनुसार, वार्ड नंबर 192 अंततः शिवसेना (यूबीटी) के पास चला गया और प्रकाश पाटनकर से यह सीट छीन ली गई। संतोष धुरी ने स्पष्ट किया कि वह न तो टिकट न मिलने से नाराज हैं और न ही सीट-बंटवारे की प्रक्रिया से। उन्होंने कहा- राज साहब ने हमें पहले ही बहुत कुछ दिया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि बातचीत के दौरान मनसे के वरिष्ठ नेता संदीप देशपांडे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। धुरी ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर से उन्हें बताया गया कि ऊपर से फैसला आया है कि राज साहब ने दो किले सरेंडर कर दिए हैं—संतोष धुरी और संदीप देशपांडे। उनके मुताबिक, बांद्रा स्थित बंगले से यह आदेश दिया गया कि न तो वे और न ही संदीप देशपांडे उम्मीदवार बनेंगे और न ही सीट-बंटवारे की प्रक्रिया में शामिल होंगे। इस घटनाक्रम को बीएमसी चुनाव 2026 से पहले मनसे के भीतर बढ़ते असंतोष और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक पुनर्संयोजन के तौर पर देखा जा रहा है।

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