
मुंबई। सरकारी जेजे अस्पताल में अप्रैल से शुरू की गई रोबोटिक सर्जरी सुविधा अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो रही है। मात्र 83 दिनों में अस्पताल ने 101 मरीजों की सफल रोबोटिक सर्जरी की, जिनका पूरा खर्च अस्पताल ने वहन किया। जहां निजी अस्पतालों में यही सर्जरी 3 से 5 लाख रुपये तक की पड़ती है, वहीं जेजे अस्पताल में इसे पूरी तरह नि:शुल्क किया जा रहा है। भारत ने हाल के वर्षों में रोबोटिक सर्जरी तकनीक में तेज़ प्रगति की है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीक, कम दर्दनाक और जल्दी ठीक होने वाली है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत से यह आधुनिक रोबोटिक प्रणाली स्थापित की। जेजे अस्पताल के डीन डॉ. अजय भंडारवार के अनुसार, पहली सर्जरी 9 अप्रैल को 37 वर्षीय हर्निया पीड़ित मरीज पर की गई थी, जबकि 101वीं सर्जरी पुणे के 27 वर्षीय किसान की हुई। अब तक इसका उपयोग पित्ताशय, हर्निया, अग्न्याशय और अन्य जटिल ऑपरेशनों में किया जा चुका है, और जल्द ही इसे लिवर, किडनी, मूत्रमार्ग, गर्भाशय तथा स्तन की सर्जरी में भी इस्तेमाल किया जाएगा। डॉ. भंडारवार ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को सटीक उपचार, कम रक्तस्राव, कम दर्द और तेज़ रिकवरी का लाभ मिलता है। अस्पताल ने घोषणा की है कि पहली 500 सर्जरी का पूरा खर्च रोबोट उपलब्ध कराने वाली कंपनी उठाएगी। इसके बाद महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के तहत गरीब मरीजों को यह सुविधा मुफ़्त जारी रखने के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।
निजी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी की कीमत 1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये के बीच होती है, जिसके कारण निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग अक्सर इससे वंचित रह जाते हैं। जेजे अस्पताल की यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में एक नया मानक स्थापित कर रही है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।




