
पुणे। एनसीपी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पुणे नगर निगम चुनावों को लेकर अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ तब तक कोई गठबंधन नहीं करेगी, जब तक पार्टी कार्यकर्ताओं के सभी संदेह और आशंकाएं पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं। पुणे में पत्रकारों से बातचीत में सुले ने कहा कि गठबंधन को लेकर बातचीत जरूर चल रही है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सुप्रिया सुले ने बताया कि पुणे नगर निगम चुनावों के मद्देनज़र एनसीपी (एसपी) और एनसीपी के बीच संवाद बना हुआ है और यदि दोनों दल साथ आने का निर्णय करते हैं, तो उसके संभावित राजनीतिक परिणामों पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी की पुणे शहर इकाई के अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने संभावित गठबंधन को लेकर अपनी नाराज़गी और चिंताएं जाहिर की थीं, जिन पर उनसे विस्तार से चर्चा की गई है। सुले ने कहा कि जगताप की आशंकाएं पूरी तरह जायज़ हैं और उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि यदि दोनों एनसीपी गुट साथ आते भी हैं, तो किसी भी तरह की विचारधारा या पार्टी नीति से समझौता नहीं किया जाएगा। पिछले राजनीतिक घटनाक्रमों को याद करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि एक समय शरद पवार को सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाने के बाद कांग्रेस से अलग होना पड़ा था, जिसके बाद एनसीपी का गठन हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में सोनिया गांधी ने राजनीतिक उदारता दिखाते हुए शरद पवार को यूपीए सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। सुले ने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता। गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह चर्चा अभी शुरुआती चरण में है और किसी भी मजबूत लोकतंत्र में संवाद और विचार-विमर्श बेहद जरूरी होता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अभी तक महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और अपने चचेरे भाई अजीत पवार से इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की है। सुले ने कहा कि पहले पार्टी कार्यकर्ताओं की राय सुनी जाएगी और उनके सभी सवालों का समाधान किया जाएगा, उसके बाद ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा। चुनाव चिन्ह को लेकर उठे सवालों पर सुप्रिया सुले ने साफ कहा कि एनसीपी (एसपी) अपने ‘तुतारी’ चुनाव चिन्ह पर ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है कि यदि गठबंधन होता है तो उनकी पार्टी ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़े। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों, जिनमें पुणे नगर निगम भी शामिल है, के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और मतगणना अगले दिन की जाएगी। हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में एनसीपी को 966 सीटें मिली थीं, जबकि एनसीपी (एसपी) को 256 सीटों पर सफलता मिली थी। इस दौरान केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह शुरू किए गए ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कार्यक्रम पर भी सुप्रिया सुले ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि MGNREGA कांग्रेस सरकार की सबसे अच्छी योजनाओं में से एक थी। उनका कहना था कि योजना का नाम बदलकर महात्मा गांधी का नाम हटाना और मजदूरी का खर्च केंद्र और राज्य के बीच 60-40 के अनुपात में बांटना गरीबों के हितों के खिलाफ है और इससे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।




