
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में देशवासियों को 26 जनवरी की शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत निरंतर आर्थिक प्रगति कर रहा है और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गणतंत्र दिवस का पर्व देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ भारत ने अपनी दिशा स्वयं तय की और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ देश ने एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणतंत्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित की। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणतंत्र का मूल आधार है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को सुदृढ़ करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी ऐतिहासिक सफलताओं को संभव बनाया है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने महिलाओं की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी हमारे गणतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है। विकसित भारत के निर्माण में ‘नारी शक्ति’ की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने बताया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है, जबकि ‘प्रधानमंत्री जन-धन योजना’ के तहत खोले गए 57 करोड़ से अधिक बैंक खातों में लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि आज महिलाएं परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। दस करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम कर रही हैं। खेत-खलिहानों से लेकर अंतरिक्ष तक, खेल से लेकर सशस्त्र बलों तक, महिलाएं देश के विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। उन्होंने खेल जगत में महिलाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप, ब्लाइंड महिला टी20 विश्व कप और शतरंज विश्व कप में भारतीय बेटियों की सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रपति ने पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। इससे महिला नेतृत्व द्वारा विकास की सोच को अभूतपूर्व बल मिलेगा और भारत समावेशी गणतंत्र का आदर्श उदाहरण बनेगा। किसानों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अन्नदाता किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत के बल पर भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना है और कृषि उत्पादों का निर्यात कर रहा है। किसानों को उचित मूल्य, रियायती ऋण, बीमा सुरक्षा, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक संबल दिया जा रहा है। गरीबी उन्मूलन पर राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों से गरीबी से जूझ रहे करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया गया है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे दोबारा गरीबी में न लौटें। ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत लगभग 81 करोड़ लोगों को खाद्यान्न सुरक्षा दी जा रही है। इसके साथ ही, चार करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण कर गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन का आधार प्रदान किया गया है। अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ये सभी प्रयास महात्मा गांधी के सर्वोदय के आदर्श को साकार करते हैं और देश को एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत की ओर अग्रसर करते हैं।




