
मुंबई (इंद्र यादव)। नवी मुंबईमें सियोन-पनवेल हाईवे, जो आमतौर पर मुंबई और पुणे के बीच की लाइफलाइन माना जाता है, हाल ही में एक ‘हाई-प्रोफाइल’ तस्करी का गवाह बना। लेकिन नवी मुंबई पुलिस की ‘चीता’ जैसी फुर्ती ने तस्करों के अरमानों पर ऐसा पानी फेरा कि अब एक आरोपी जेल की सलाखों के पीछे है और दूसरा शायद जूते घिस रहा है।कैसे बिछाया गया जाल (द ‘ऑपरेशन मिडनाइट’)जब दुनिया सो रही थी, नवी मुंबई पुलिस की गश्ती टीम सियोन-पनवेल हाईवे पर अपनी पैनी नजरें गड़ाए खड़ी थी। तभी एक संदिग्ध कार को रुकने का इशारा किया गया।सस्पेंस: कार रुकते ही ड्राइवर साइड का दरवाजा खुला और ‘मुख्य खिलाड़ी’ ने ऐसी दौड़ लगाई कि ओलंपिक के धावक भी शरमा जाएं।पकड़: इससे पहले कि पुलिस उसे पकड़ पाती, वो अंधेरे का फायदा उठाकर चंपत हो गया। लेकिन गाड़ी में पीछे बैठा एक नाबालिग पुलिस के हत्थे चढ़ गया। शायद उसे लगा था कि ‘बच्चा’ समझकर पुलिस छोड़ देगी, पर यहाँ कानून का डंडा बराबर चलता है।माल की ‘मार्केट वैल्यू’ और गणितपुलिस ने जब डिग्गी खोली, तो वहां कोई सूटकेस या राशन नहीं था। वहां मौजूद था 10.13 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा।कीमत: ₹12,60,000 (करीब साढ़े बारह लाख रुपये)।बोनस जब्ती: पुलिस ने सिर्फ गांजा ही नहीं, बल्कि तस्करी में इस्तेमाल की गई चकाचक कार और चमचमाते मोबाइल फोंस भी जब्त कर लिए हैं। यानी अब न कॉल करने की सुविधा बची, न भागने के लिए पहिए!NDPS एक्ट की ‘खातिरदारी’पुलिस ने इस मामले में NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। कानून के जानकारों की मानें तो इस एक्ट की धाराएं इतनी सख्त हैं कि जमानत मिलना ‘लोहे के चने चबाने’ जैसा होता है।पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह माल आ कहाँ से रहा था और इसकी ‘डिलीवरी’ कहाँ होनी थी। क्या नवी मुंबई के किसी कॉलेज या पब में इसकी सप्लाई का प्लान था! इस ‘सप्लाई चेन’ को तोड़ना अब पुलिस का अगला बड़ा टारगेट है।पुलिस की चेतावनी: “पुष्पा” मत बनोनवी मुंबई पुलिस ने साफ कर दिया है कि तस्कर चाहे कितनी भी ‘क्रिएटिविटी’ दिखा लें, कानून के हाथ उनकी गर्दन तक पहुँच ही जाएंगे। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस की टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही ‘फरार मियां’ भी पुलिस की बिरयानी (यानी लॉक-अप के खाने) का आनंद लेंगे।




