
मुंबई। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने शहर के 10 बाहरी नागरिक अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए पका हुआ शाकाहारी भोजन आउटसोर्स करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस फैसले के तहत अब मरीजों को अस्पताल की रसोई के बजाय बाहरी सप्लायर द्वारा तैयार किया गया खाना उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, इस कदम का बीएमसी कर्मचारियों और मज़दूर यूनियनों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है। टेंडर के अनुसार एस.के. पाटिल अस्पताल, एम.डब्ल्यू. देसाई अस्पताल, श्री हरिलाल भगवती अस्पताल, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले अस्पताल, दीवालीबेन मेहता (एमएए) अस्पताल, पंडित मदनमोहन मालवीय शताब्दी अस्पताल, एस.वी.डी. सावरकर अस्पताल, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल, राजावाड़ी अस्पताल और संक्रामक रोगों के लिए कस्तूरबा अस्पताल में मरीजों को बाहर से तैयार भोजन मिलेगा। बीएमसी का दावा है कि इस व्यवस्था से प्रतिदिन लगभग 1,600 मरीजों को लाभ होगा। इस टेंडर में अधिक रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में सामने आई है। कंपनी को रोज़ाना मरीजों के लिए पूरा भोजन उपलब्ध कराने का कॉन्ट्रैक्ट मिलने की संभावना है। इसमें सुबह 9 बजे चाय और नाश्ता, दोपहर 3 बजे चाय-बिस्किट और सुबह 11:30 बजे व शाम 7:30 बजे लंच और डिनर शामिल है। इसके साथ ही डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, नमक-रहित, कम नमक वाला और आरटी फीड जैसे विशेष डाइट की व्यवस्था भी की जाएगी। शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट 11 महीनों का होगा, जिसमें कुल 17.28 लाख फूड यूनिट शामिल हैं। एक फूड यूनिट एक मरीज के पूरे दिन के खाने के बराबर मानी गई है। प्रति यूनिट दर 174.60 रुपये तय की गई है, जिससे कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू लगभग 301.71 करोड़ रुपये बैठती है। टेंडर में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां सत्कार कैटर्स ने 177 रुपये प्रति यूनिट की बोली लगाई, लेकिन 2.40 रुपये के मामूली अंतर से पिछड़ गई। बीएमसी ने खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सख्त शर्तें भी तय की हैं। घटिया गुणवत्ता पाए जाने पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की टेस्टिंग अनिवार्य होगी और यदि तीन से अधिक बार उल्लंघन हुआ तो कॉन्ट्रैक्ट तुरंत रद्द कर दिया जाएगा, जमा राशि जब्त की जाएगी और सप्लायर को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
इन तमाम शर्तों के बावजूद आउटसोर्सिंग के फैसले से बीएमसी के किचन स्टाफ में नाराज़गी है। खासकर कस्तूरबा अस्पताल में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। म्युनिसिपल मज़दूर यूनियन का कहना है कि इस फैसले से कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी और म्युनिसिपल सेवाओं का निजीकरण बढ़ेगा।




