Tuesday, January 13, 2026
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नया वर्ष: आरंभ, आशा और उम्मीदों के स्वागत का समय

विजय कुमार शर्मा
समय जब द्वार पर दस्तक देता है, तो वह शोर नहीं करता। वह चुपचाप आता है, जीवन की पुस्तक का एक पन्ना पलटता है और आगे बढ़ जाता है। उसी क्षण मन के भीतर एक अनकही हलचल जन्म लेती है। वर्ष का अंत और नए वर्ष का आरंभ केवल तारीखों का बदलना नहीं है, बल्कि आत्मा के भीतर चल रही उस मौन प्रक्रिया का संकेत है, जहाँ स्मृतियाँ, अनुभव, सीख और आशाएँ एक साथ आकार लेती हैं। यह समय ठहरकर देखने का भी है और आगे बढ़ने का भी। बीता हुआ वर्ष हमारे जीवन का एक संपूर्ण अध्याय होता है। उसमें लिखी हर पंक्ति हमारे कर्मों, हमारे निर्णयों और हमारी भावनाओं से बनी होती है। कुछ पंक्तियाँ मुस्कान बनकर मन में उतर जाती हैं, तो कुछ पंक्तियाँ चुभती हुई पीड़ा की तरह स्मृतियों में रह जाती हैं। हँसी से भरे क्षण, आँखों को नम कर देने वाली रातें, संघर्ष से उपजी सुबहें और संतोष से भरी संध्याएँ, सब मिलकर उस वर्ष को हमारे जीवन की कथा में स्थायी बना देते हैं। समय लौटकर नहीं आता, पर वह हमें भीतर से गढ़कर अवश्य चला जाता है। हर बीता हुआ समय हमें कुछ न कुछ सौंपता है। कभी वह अनुभव देता है, कभी धैर्य, कभी आत्मविश्वास और कभी आत्मबोध। कई बार ऐसा लगता है कि हमने बहुत कुछ खो दिया, पर बाद में समझ आता है कि वही खोना हमें अधिक सजग और मजबूत बना गया। कुछ सपने पूरे होते हैं, कुछ अधूरे रह जाते हैं और कुछ नए सपनों का बीज भी इसी प्रक्रिया में अंकुरित हो जाता है। वर्ष का अंत इन सबका मौन लेखा-जोखा है, जहाँ हमारा विवेक ही सबसे बड़ा साक्षी होता है। नए साल की उम्मीद मनुष्य की सबसे सुंदर और उजली प्रवृत्ति है। चाहे बीता समय कठिनाइयों से भरा रहा हो, चाहे परिस्थितियाँ बार-बार परीक्षा लेती रही हों, फिर भी नए साल के आगमन के साथ मन में एक सहज विश्वास जन्म लेता है कि आगे कुछ बेहतर होगा। यही विश्वास जीवन को थामे रखता है। नया साल एक नए सवेरे की तरह होता है, जो यह संकेत देता है कि अँधेरा स्थायी नहीं होता और उजाले की संभावना कभी समाप्त नहीं होती। यह उम्मीद केवल बाहरी परिस्थितियों के बदलने की नहीं होती, बल्कि स्वयं के भीतर परिवर्तन की आकांक्षा भी होती है। नए साल के साथ हम स्वयं से कई संकल्प करते हैं। अधिक संयम, अधिक परिश्रम, अधिक सकारात्मकता और अधिक संवेदनशीलता के साथ जीने की इच्छा जाग उठती है। पुराने दोषों को पीछे छोड़ने और नई आदतों को अपनाने का साहस इसी समय सबसे प्रबल होता है। इस प्रकार नया साल आत्मसुधार का एक सशक्त अवसर बन जाता है। समय की विदाई के साथ एक हल्का सा विषाद भी मन में उतर आता है। क्योंकि कुछ लोग, कुछ अवसर और कुछ क्षण स्मृतियों में ही सिमटकर रह जाते हैं। कभी यह अहसास होता है कि काश कुछ बातों को समय रहते कह दिया होता, कुछ रिश्तों को और अधिक सहेज लिया होता। यह पछतावा मन को उदास करता है, पर यही उदासी हमें आने वाले समय के प्रति अधिक सजग भी बनाती है। नया साल हमें भविष्य की ओर देखने की दृष्टि देता है। जीवन केवल बीते हुए पलों का संग्रह नहीं है, बल्कि निरंतर आगे बढ़ने की यात्रा है। यदि हम केवल अतीत की असफलताओं में उलझे रहें, तो आगे की राह धुँधली हो जाती है। नया समय यह सिखाता है कि बीते अनुभवों से सीख लो, पर उनमें बँधकर मत रहो। आगे का मार्ग हमारे साहस और कर्म की प्रतीक्षा करता है। समय का यह निरंतर प्रवाह हमें विनम्र बनाता है। हर वर्ष का परिवर्तन यह याद दिलाता है कि जीवन क्षणभंगुर है। इसलिए जो समय हमारे पास है, उसे अर्थपूर्ण बनाना हमारा कर्तव्य है। नए साल की उम्मीद हमें यह अवसर देती है कि हम अपने रिश्तों को अधिक महत्व दें, अपने सपनों के प्रति ईमानदार रहें और समाज के प्रति अपने दायित्वों को गहराई से समझें। पुराने की विदाई और नए आरंभ की यह घड़ी जीवन की उसी अनंत यात्रा का हिस्सा है, जहाँ हर संध्या एक नई सुबह की भूमिका बनती है। यह उम्मीद हमारे भीतर दीपक की तरह जलती रहती है, जो अँधेरे रास्तों में भी दिशा दिखाती है। जब नया वर्ष धीरे से दस्तक देता है, तब जीवन हमसे यही कहता है कि चलते रहो, सीखते रहो और विश्वास बनाए रखो। क्योंकि जब तक उम्मीद जीवित है, तब तक हर दिन नए सवेरे में बदलने की क्षमता रखता है।

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