
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने उनके नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल को अपमानित किया। ममता बनर्जी ने सीईसी को “घमंडी और झूठा” करार देते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार उन्होंने किसी भी चुनाव आयुक्त से पहले कभी नहीं देखा। सोमवार को ममता बनर्जी कुछ एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से प्रभावित परिवारों और पार्टी नेताओं के साथ काली शॉल ओढ़कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि सीईसी द्वारा अपमान किए जाने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। ममता बनर्जी ने कहा- मैंने उनसे कहा कि मैं उनकी कुर्सी की इज्जत करती हूं, क्योंकि कोई भी कुर्सी किसी के लिए स्थायी नहीं होती। एक दिन आपको जाना ही है। ऐसी मिसाल मत बनाइए।
एसआईआरको लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल
बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर ममता बनर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा- सिर्फ बंगाल को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है? लोकतंत्र में चुनाव लोकतंत्र का त्योहार होता है। आपने 58 लाख लोगों को वोटर लिस्ट से हटा दिया है और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। ममता ने पूछा कि विधानसभा चुनाव से सिर्फ तीन महीने पहले एसआईआर कराने की क्या जरूरत थी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि असम जैसे भाजपा शासित राज्यों में SIR क्यों नहीं किया गया।
बीजेपी की पावर बनाम लोगों की पावर
निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर ममता बनर्जी ने कहा- अगर उनके पास बीजेपी की पावर है, तो हमारे पास लोगों की पावर है। बंगाल को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया असंसदीय और अलोकतांत्रिक है। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट से करीब दो करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं और जरूरत पड़ने पर वह लाखों लोगों को दिल्ली लाकर यह दिखा सकती हैं कि आम जनता के साथ क्या हो रहा है।
दिल्ली पुलिस से बंग भवन के बाहर बहस
इससे पहले चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन के बाहर भारी पुलिस तैनाती को लेकर ममता बनर्जी की दिल्ली पुलिस से बहस भी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर से प्रभावित परिवारों को डराया और धमकाया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने कहा- हम यहां आंदोलन करने नहीं, न्याय मांगने आए हैं। लोग मर रहे हैं, उनके परिवारों को मीडिया से बात करने तक से रोका जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देतीं, बल्कि “ऊपर बैठे लोगों” को जिम्मेदार मानती हैं। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का अप्रत्यक्ष संदर्भ लेते हुए कहा कि आम लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
लगभग 50 प्रभावित परिवार दिल्ली लाए गए
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में SIR से प्रभावित करीब 50 परिवारों को राष्ट्रीय राजधानी लाया गया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें कथित तौर पर गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया, और ऐसे परिवार भी हैं जिनका दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण उनके परिजनों की मृत्यु हुई। टीएमसी नेताओं ने बताया कि विरोध के प्रतीक के रूप में ममता बनर्जी और प्रतिनिधिमंडल ने काली शॉल और काले कपड़े पहने थे। पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच टकराव से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से अब तक ममता के आरोपों पर कोई विस्तृत औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।




