Wednesday, April 8, 2026
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‘ज्ञान भारतम्’ परियोजना के तहत देशव्यापी हस्तलिखित सर्वेक्षण शुरू, नागरिकों से सहभागिता की अपील

मुंबई। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम्’ (Gyan Bharatam) परियोजना के अंतर्गत देशव्यापी हस्तलिखित सर्वेक्षण अभियान 16 मार्च 2026 से शुरू कर दिया गया है। इस अभियान के लिए “Gyan Bharatam” नामक मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से हस्तलिखितों का सर्वेक्षण, सत्यापन और दस्तावेजीकरण किया जाएगा। मराठी भाषा विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन हस्तलिखित उपलब्ध हैं, तो वे इसकी जानकारी इस मोबाइल ऐप पर अपलोड कर इस राष्ट्रीय अभियान में भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि भारत को हस्तलिखितों की समृद्ध विरासत प्राप्त है, जिसके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान पीढ़ियों तक पहुंचता रहा है। हालांकि, ये हस्तलिखित देशभर में बिखरे हुए हैं। इन्हें एकत्रित कर संरक्षित करने और डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस परियोजना की शुरुआत की गई है। केंद्रीय बजट 2025 में घोषित इस योजना के तहत देशभर में एक करोड़ से अधिक हस्तलिखितों की खोज और पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही एक राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह (National Digital Repository) तैयार किया जाएगा, जिससे यह धरोहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेगी। हस्तलिखितों की मूल स्वामित्व संबंधित संस्था या व्यक्ति के पास ही रहेगा। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। महाराष्ट्र में इस परियोजना के लिए कवि कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, भांडारकर प्राच्यविद्या शोध संस्थान, आनंद आश्रम संस्थान और भारत इतिहास संशोधक मंडल को प्रमुख केंद्र के रूप में नियुक्त किया गया है। राज्य के लिए नोडल संस्था के रूप में पुराभिलेख संचालनालय, महाराष्ट्र राज्य, मुंबई को नियुक्त किया गया है। इसके तहत सुजितकुमार उगले नोडल अधिकारी और अंजली ढमाल सह-नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। इस अभियान के अंतर्गत सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त करें, जिला स्तरीय समितियां बनाएं और मंदिरों, मठों, शैक्षणिक संस्थाओं, पुस्तकालयों तथा निजी संग्राहकों को इस सर्वेक्षण में शामिल करें। सरकार ने उम्मीद जताई है कि इस अभियान में शैक्षणिक संस्थान, संग्रहालय, शोधकर्ता, पारंपरिक विद्वान, एनसीसी-एनएसएस स्वयंसेवक और छात्र सक्रिय रूप से भाग लेंगे, जिससे भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को संरक्षित और वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जा सके।

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