
नासिक। आगामी नासिक महानगरपालिका चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। महायुति (भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना) ने भी संगठनात्मक मजबूती पर काम शुरू कर दिया है, लेकिन भीतर ही भीतर दोनों दलों में अलग-अलग चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं। नासिक मनपा की 122 सीटों पर विजय का लक्ष्य तय किया गया है, मगर भाजपा और शिंदे शिवसेना में बढ़ती ‘इनकमिंग’ और इच्छुक उम्मीदवारों की लंबी सूची के चलते स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र चुनावी रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। मंत्री गिरीश महाजन के ‘100 पार’ के नारे ने शिंदे शिवसेना के नेताओं में असमंजस बढ़ा दिया है। वहीं, मंत्री दादा भुसे ने भी संकेत दिया है कि यदि भाजपा आक्रामक लक्ष्य रख रही है, तो उनकी पार्टी भी अपने संगठन को उतना ही सशक्त करने और जरूरत पड़ने पर अकेले चुनाव लड़ने को तैयार है। भाजपा के प्रवक्ता अजित चव्हाण ने शिंदे शिवसेना को नसीहत देते हुए कहा कि गठबंधन या स्वतंत्र चुनाव का फैसला वरिष्ठ नेतृत्व पर छोड़ देना चाहिए और स्थानीय स्तर पर ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जो साझेदारी में दरार डालें।
2027 में नासिक में होने वाले कुंभ मेले को लेकर भी दोनों दलों में महापौर पद की होड़ है। हर पक्ष चाहता है कि महापौर की कुर्सी उनके पास हो, जिससे मेले के दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव बनाए रखा जा सके। यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा पार्षदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए दोनों दल अपने-अपने बूते मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि शीर्ष नेतृत्व महायुति को एकजुट रख पाता है या नासिक मनपा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग राह पकड़ते हैं।




