
वरिष्ठ लेखक- जितेंद्र पाण्डेय
अमेरिकी राष्ट्रपति बड़बोले डॉनल्ड ट्रंप जब भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद सप्लीमेंटरी टैरिफ बढ़ाने की धमकी देने के बावजूद झुका नहीं पाए, तो शह देकर अपने पिल्ले पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष मुनीर के द्वारा सिंधु नदी के पानी के बहाने भारत को मिसाइलें गिराने की गीदड़ भभकी दिलाई है, ताकि भारत पर प्रेशर डाला जा सके। सबसे पहले, धूर्त व्यापारी ट्रंप, तुम ताकतवर होते तो वियतनाम जैसा छोटा सा देश तुम्हारी शक्ति के आगे झुक जाता, लेकिन नहीं। 12 साल तक वियतनाम के जांबाज़ युवा तुम्हारी शक्तिशाली सेना से लड़े, तुम्हारी सेना उनका कुछ नहीं उखाड़ पाई। अफगानिस्तान के सिर्फ एक कबीले तालिबान ने तुम्हे अफगानिस्तान छोड़कर भागने और अपने युद्धक विमान, टैंक, तोप, बख्तरबंद गाड़ियां और तमाम साजो-सामान छोड़कर भागने को मजबूर कर दिया। निर्धारित अवधि के एक दिन पहले ही भागना पड़ा तुम्हारी सेना को। भारत पर तुम चाहे जितना टैरिफ लगा लो, 200% कर दो, लेकिन भारत झुकेगा नहीं तुम जैसे कायर के सामने। भारत स्वतंत्र, सार्वभौम, शक्तिशाली राष्ट्र है। चीन से डर गए, टैरिफ 90 दिन के लिए टाल दिए। कहां गई तुम्हारी मर्दानगी? अमेरिका कायर रहा है, कायर ही रहेगा। यूक्रेन को हथियार देकर बचाने की कोशिश अमेरिका, ब्रिटेन सहित नाटो राष्ट्र बचा नहीं पाए। रूस ने अकेले तुम्हारी नाक में पानी भर दिया। अब रूसी राष्ट्रपति के साथ शांति वार्ता करने जा रहे हो। बचा नहीं पाए यूक्रेन को, अलास्का में शांति वार्ता के लिए मजबूर हो गए। यह पहले ही कहा था रूस के भय से कि कुछ जमीनों की अदला-बदली हो सकती है। यानी तुम्हारे चक्कर में यूक्रेन बर्बाद हो गया, खंडहर हो गया समूचा यूक्रेन। कितने अविश्वसनीय हो तुम और तुम्हारा अमेरिका। तुम जैसे यूरोपियन गोरों ने अमेरिकी धरती पर ताकत और झूठ के बूते कब्जा कर लिया, मार लिया वहां के मूल निवासियों का हक। कितनी शर्म की बात है? वहीं काम इजरायल खुद कर रहा। रिफ्यूजी बनकर आया था और तुम्हारी ताकत के भरोसे मूल निवासियों का कत्ल-ए-आम किया, बच्चों तक को नहीं छोड़ा। गज़ा में तुम अपना मॉडल बनकर दौलत लूटना चाहते थे। क्या किया? तुमने ईरान पर हमला किया, उसे परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए। ईरान को कमजोर फिलिस्तीन समझ लिया था, उसने तुम्हारे सैनिक बेड़े को ही ध्वस्त कर दिया। क्या कर लिया ईरान का?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है, इसी लिए कब्जा करने और मांस सहित दूध बेचने का ख्वाब पूरा नहीं होगा। भारत की कोई भी सरकार भारत की प्रतिष्ठा के खिलाफ, विधर्मी बनाने के लिए तैयार नहीं होगा। तुम भूल गए, जब 1965 में भारत की बहादुर सेना ने पाकिस्तान के लाहौर पर कब्जा कर लिया था, धोखे से तुमने हमारे जनप्रिय प्रधानमंत्री की हत्या करा दी। तुमने भारत को गेहूं देने से मना कर दिया। भारत के उस लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया। जवानों ने लाहौर जीता, किसानों ने भारत को अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भर ही नहीं, इस योग्य बनाया कि एक-तिहाई विश्व के लोगों का पेट भरने काबिल बनाया। स्वाभिमानी भारत को तुम्हारे पूर्व राष्ट्रपतियों ने 1971 में सातवां बेड़ा भेजने की धमकी दी। भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर इतिहास ही नहीं, भूगोल बदल दिया। अमेरिका देखता और हाथ मलता रह गया। कारगिल युद्ध के समय भी धमकियां दी, लेकिन भारत ने अमेरिका को कोई भाव नहीं दिया। दो-दो बार भारत ने परमाणु बमों का विस्फोट कर परीक्षण किया। तुमने भारत पर बार-बार बैन लगाया, क्या उखाड़ लिया भारत का? भारत निरंतर उन्नति करता गया और हमेशा तुम्हारी धमकियों का जवाब आंखों में आंखें मिलाकर दिया। तुम समझते हो कि गौतम अडानी की गर्दन दबोच लोगे? औकात है तो आकर उन्हें पकड़कर दिखाओ, हिम्मत ही नहीं है तुममें। तुम चीन से डर गए, भारत से भी डरना सीख लो और मुनीर मुगालते में मत रहो। बार-बार पीटे गए हो तुम। आमने-सामने आकर युद्ध करने की हिम्मत नहीं है तुझमें। आतंकी भेजकर निर्दोष की हत्या कराने वाले कायर हो तुम। पहलगाम के बदले ऑपरेशन सिंदूर का खामियाजा भूल गए? यह तो दरियादिली थी सरकार की, जो तुम्हारी सेना पर हमला करने से रोक दिया था। फिर भी हमारी बहादुर सेना ने तुम्हारे नौ आतंकी ठिकाने ध्वस्त कर दिए, तुम्हारे 11 हवाई अड्डों पर बम गिराकर ध्वस्त कर दिया। अगर सरकार ने खुली छूट दी होती, तो अब तक तुम्हारे पाकिस्तान का वजूद ही मिट गया होता दुनिया के नक्शे से। तुम भी जिंदा नहीं रहते। याद करो, अमेरिका ने तुम्हे पैटर्न टैंक दिया था। भुट्टो गर्व से कहते रहे, पैटर्न टैंक पर बैठकर लाहौर में सुबह का नाश्ता करेंगे और रात का डिनर दिल्ली में। क्या हश्र हुआ तुम्हारे टैंकों का? तिनके की तरह उड़ा दिए गए, धुआं-धुआं हो गया। तुम अपने बाप ट्रंप की सलाह के भरोसे सिंधु नदी पर बांध को उड़ाने की धमकी दे रहे हो। नामक हराम, भूल गए भारत ने पाकिस्तानी जनता को भूखा मरने से बचाने के लिए रहम कर, पाकिस्तान में कृषि करने के लिए कृपा करके सिंधु नदी का जल देना स्वीकार कर लिया, वरना न तुम रहते और न पाकिस्तान की अवाम। भूखे मर जाते तुम सब। अगर तुम्हारी जैसी नीच सोच नेहरू की होती, तो जब भाखड़ा नांगल बांध बनाया गया, तभी सिंधु नदी पर भी बांध बनाकर तुम्हारे देश को प्यासा मार दिया होता। भारत ने पाकिस्तान पर हमेशा हमदर्दी और मानवता दिखाई, जिसे तुम कमजोरी समझ बैठे। ऑपरेशन सिंदूर के समय अमेरिका, चीन, तुर्की, अज़रबैजान तुम्हे युद्धक विमान, ड्रोन, सैटेलाइट, हथियार, मिसाइल दिया। उनका क्या हश्र हुआ, मत भूलना। भारत तुम्हारा असली बाप है और कहावत है, भूलकर भी बाप से पंगा नहीं लेना। अरे महामूर्ख मुनीर, अक्ल का अंधा है तू। केवल सिंधु नदी का जल रोकने की धमकी पर इतने आग-बबूला हो रहे, जबकि सिंधु नदी पर कोई बांध बनाना शुरू ही नहीं हुआ है। जिस दिन बांध बनने लगेगा, तो तू क्या, तुम्हारा बाप ट्रंप भी नहीं रोक पाएगा। परमाणु युद्ध की धमकी देता है तू? कहावत है, गीदड़ की मौत आती है तो शहर की ओर भागता है। तू भी भारत की ओर भागने की मत सोच, बेमौत मारा जाएगा। मारा, तुम्हारे पास परमाणु बम है जो अमेरिका की कृपा से बनाया गया है। तू एक भी परमाणु बम भारत पर गिराकर देख, छोटा-मोटा नुकसान कर पाएगा, लेकिन इतने में धरती, आसमान और समुद्र से इतने परमाणु बम पाकिस्तान पर एक पल में गिरेंगे कि पाकिस्तान का नाम और निशान ही मिट जाएगा। दो घंटे भी नहीं लगेंगे पाकिस्तान को मिटने में। भूल गया तू कि जान-बूझकर नूर बेस पर हमारी सेना ने हमला कर तुझे बता दिया था कि भारत जब चाहेगा, तेरे सारे परमाणु बमों को तुम्हारे आकाश में आए बिना ही उड़ाने की क्षमता है भारतीय सेना में। यह संकेत था कि शायद तू समझ जाए, लेकिन तू तो मूर्खों का सरदार महामूर्ख निकला, जो अमेरिकी ट्रंप के बहकावे में आकर भारत को गीदड़ भभकी दे दिया। भारत से दुश्मनी छोड़कर अपने देश की अवाम को देख, भूख से तड़प रही है। जितनी एनर्जी तू भारत को धमकाने में लगाता है, उसकी आधी भी पाकिस्तानी अवाम की बहबूदी पर लगाता तो भीख का कटोरा हाथ में लेने की जरूरत ही नहीं होती। भारत को परमाणु बम की धमकी उस अमेरिकी भूमि से दी, जहां बाकायदा कानून बनाया गया है कि अमेरिकी धरती से कोई परमाणु बम से हमले की धमकी देता है, तो वह अपराध करता है जिसे दंड देने का विधान बनाया गया है। ऐसे में मुनीर द्वारा भारत को परमाणु बम हमले की धमकी देने पर अमेरिका को उसे गिरफ्तार कर, अमेरिकी कानून तोड़ने का अपराधी मानकर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसा कुछ ट्रंप शासन प्रशासन का न करना, ट्रंप की मर्जी और प्रोत्साहन माना जाएगा। विदेशी धरती से पाकिस्तान भारत को धमकी दे रहा और अमेरिका खामोश है, जिसका अर्थ है अब ट्रंप भारत पर धौंस जमाने के लिए पाकिस्तानी जनरल का सहारा ले रहे हैं। पाकिस्तान के कंधे पर बंदूक रखकर भारत को परमाणु हमले का डर दिखाकर, ट्रंप भारत को झुकाना चाहते हैं, जिसमें ट्रंप को सफलता नहीं मिलेगी। भारत ने साफ कह दिया है, अमेरिका के साथ वह समझौता नहीं करेगा जिसमें भारत का नुकसान होता हो। भारत सरकार देश के किसानों, कंपनियों के खिलाफ कोई ऐसा काम नहीं करेगी जिससे अहित हो। ट्रंप जानते हैं कि ब्रिक्स अपनी साझा करेंसी लाकर डॉलर का रुतबा खत्म कर देगा। यह एक तरह से अमेरिकी दादागिरी को रोकने का माध्यम है। भारत, रूस, चीन, ब्राजील और ईरान मिलकर अपने-अपने बाजार सदस्य देशों के लिए मुक्त करेंगे, लेकिन इसमें भी भारत को सजग रहना होगा। निर्यात बढ़ाने पर जोर देना होगा। अभी भारत, चीन से आयात मामले में अपने निर्यात बढ़ाने की सोचे। व्यापार घाटा अधिक होने से भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। शक्ति के दंभ के नशे में चूर ट्रंप को मालूम होना चाहिए कि भारत और ब्राजील के ऊपर 50% टैरिफ लगाकर, वे अमेरिका की जनता को अधिक धन खर्च कराने पर आमादा हैं, जिस कारण खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी। अभी ही अमेरिका पर विदेशी कर्ज उसकी जीडीपी से बहुत अधिक है, जिसका ब्याज चुकाने में उसकी एक ट्रिलियन पूंजी हर वर्ष डूब रही है। अमेरिकी जनता महंगा सामान खरीदने के लिए ट्रंप की टैरिफ नीति सहन नहीं करेगी, तो निश्चित ही एक दिन अमेरिकी सड़क पर उतरकर ट्रंप का विरोध शुरू कर देगी। अमेरिकी थिंक टैंक ट्रंप की टैरिफ नीति को अमेरिका के लिए खतरनाक बताते हैं, जबकि ट्रंप के लोग अमेरिका को लाभ बताने में व्यस्त हैं। अमेरिकी शिक्षित जनता अभी परिणाम देख रही है। जैसे ही उस पर भार बढ़ेगा, विरोध शुरू हो जाएगा, जब भारत से दवा जैसी चीजें महंगी खरीदनी पड़ेंगी। भारत सरकार ने अमेरिकी दबाव में नहीं झुकने का अभी जो फैसला किया है, अपनी सत्ता बचाने के लिए किया है। जिस दिन अमेरिकी दबाव के आगे झुकी, उसी दिन सत्ता की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी।




